अनुभूत टोटके

सत्यता

भारत में टोटकों का प्रचलन प्राचीन काल से ही मान्य रहा है,शिक्षा का होना और नही होना दोनो ही इन टोटकों के कभी आडे नही आये। वर्तमान में शिक्षा के चलते लोग अपने अपने अनुसार अपने अपने व्यक्तिगत विचार बताते है,कोई कहता है,कि पुराने दकियानूसी विचार है,कोई कहता है कि कोरी कल्पना है,कोई कहता है कि सब कुछ भगवान भरोसे हो रहा है,लेकिन जो लोग आम को खाकर खटाई से बैर करते है,उनके विचारों पर हंसी तो आती है,लेकिन तरस भी आता है कि आज मद के अन्दर वे अपने को ही भूल रहे है,अपने को पहिचान नही रहे है,उन्हे उन्ही लोगों का साथ अच्छा केवल इसलिये लगता है कि वे उनके द्वारा समाप्त किये जायेगे। लगभग तीन हजार साल से अधिक समय के साक्ष्य तो सभी के सामने है,इससे भी अधिक समय से यह मानव सभ्यता का विकास लगातार चालू है,प्राचीन गणनाओं के आधार पर जो सूत्र बना दिये गये थे उन्ही के अनुसार आज का मनुष्य अपने अपने क्षेत्र मे विकास कर रहा है,कोई नही चीज बनाकर उसे विश्व के सामने किया होता तो माना भी जा सकता था।

अनुभूत टोटके

प्रकृति के अनुसार कोई व्यक्ति जब अपने ही कर्मों के अनुसार दुख उठाता है और जब वह अपने किये की सजा पा लेता है तो मनुष्य ही उस व्यक्ति के दुखों को दूर करने का उपाय करता है। भौतिक कारणों के अनुसार व्यक्ति को बीमारी का इलाज करवाने के लिये अस्पताल में जाना पडता है,अगर व्यक्ति को दुख और उठाना है तो अस्पताल का डाक्टर नही मिलता है,मिलता भी है तो बीमारी को किसी तरह से नही पहिचान पाता है और बुखार की जगह पर अन्य किसी रोग की दवा करने लगता है,परिणाम में वह व्यक्ति जो दुख झेल रहा था,अन्य प्रकार की दवा खाने और उसके रियेक्सन करने के कारण नया दुख झेलने लगता है,तो वजाय दुख दूर होने और दुख मिलने लगते है। पुराने जमाने में कोई बडे डाक्टर अस्पताल नही थे,पुरुखों के पास केवल अनुभूत उपाय थे,जिनके द्वारा वे रोग को तुरत दूर कर देते थे,जैसे किसी सुनसान स्थान या पेड के पास जाने पर वहां पर लगी बर्र या ततैया के झुंड के द्वारा आक्रमण करने पर व्यक्ति सहन शील होता है और विष को झेलने की हिम्मत होती है तो वह बच जाता है,अन्यथा जहरीला डंक व्यक्ति के प्राण ही लेलेता है,लेकिन इसी समय एक टोटका काम आता है,कि दाहिने हाथ के अंगूठे में अगर ततैया ने डंक मार दिया है तो फ़ौरन बायें हाथ के अंगूठे को पानी से धो डालिये,विष का पता ही नही चलेगा कि ततैया या बर्र ने काटा भी है या नहीं,इसी बात के लिये जब तक डाक्टर के पास जाते,बर्र या ततैया के डंक को निकलवाते विष रोधी इन्जेक्सन लगवाते,तो विष का दुख तो दूर हो जाता,लेकिन उस इन्जेक्सन का कुप्रभाव दिमाग की नशों को प्रभाव हीन भी कर सकता था।

पढाई में याददास्त बढाने का टोटका

याददास्त कोई हौवा नही है,कि याद होता नही है,और याद होता नही है तो पढाई बेकार हो जाती है,परीक्षा में परिणाम नकारात्मक आता है,और दिमाग का एक कौना मानने लगता है कि यह पढाई बेकार है,इसे छोड कर कोई जीवन यापन का काम कर लेना चाहिये,और इस बेकार के झमेले को छोड देना चाहिये,लेकिन नही अगर वास्तव मे आपको पढने का चाव है और आप चाहते है कि आपका परिणाम भी उन्ही लोगों की तरह से आये जैसे कि ब्रिलियेंन्ट बच्चों का आता है,तो इस टोटके को अंजवा लीजिये।
शाम को खाना खा कर बायीं करवट ढाई घंटे के लिये लेट जाइये,फ़िर ढाई घंटे दाहिनी करवट लेट जाइये,और ढाई घंटे उठकर सीधे बैठ कर पढना चालू कर दीजिये,यह क्रम लगातार चालू रखिये,देखिये कि जो टापिक कभी याद नही होते थे,इतनी अच्छी तरह से याद हो जायेंगे कि खुद को विश्वास ही नहीं होगा।

अमीर बनने का अनुभूत टोटका

जो भी कमाया जाये उसका दसवां हिस्सा गरीबों को भोजन,कन्याओं को भोजन और वस्त्र,कन्यायों की शादी,धर्म स्थानों को बनाने के काम,आदि में खर्च करिये,देखिये कि आपकी आमदनी कितनी जल्दी बढनी शुरु हो जाती है। लेकिन दसवें हिस्से अधिक खर्च करने पर बजाय आमदनी बढने के घटने लगेगी।

शादी करने का अनुभूत उपाय

पुरुषों को विभिन्न रंगों से स्त्रियों की तस्वीरें और महिलाओं को लाल रंग से पुरुषों की तस्वीर सफ़ेद कागज पर रोजाना तीन महिने तक एक एक बनानी चाहिये।

ट्रांसफ़र करवाने का उपाय

कार्य स्थान पर जाने के बाद पैर धोकर अपने स्थान पर बैठना चाहिये,पिसी हल्दी को बहते पानी में बहाना चाहिये।

घर की कलह को समाप्त करने का उपाय

रोजाना सुबह जागकर अपने स्वर को देखना चाहिये,नाक के बायें स्वर से जागने पर फ़ौरन बिस्तर छोड कर अपने काम में लग जाना चाहिये,अगर नाक से दाहिना स्वर चल रहा है तो दाहिनी तरफ़ बगल के नीचे तकिया लगाकर दुबारा से सो जाना चाहिये,कुछ समय में बायां स्वर चलने लगेगा,सही तरीके से चलने पर बिस्तर छोड देना चाहिये।

संतान होने और नही होने की पहिचान करना

पुरुष और स्त्री के दाहिने हाथ मे साफ़ मिट्टी रख कर उसके अन्दर थोडा दही और पिसी शुद्ध हल्दी रखनी चाहिये,यह काम रात को सोने से पहले करना चाहिये,सुबह अगर दोनो के हाथ में हल्दी का रंग लाल हो गया है तो संतान आने का समय है,स्त्री के हाथ में लाल है और पुरुष के हाथ में पीली है तो स्त्री के अन्दर कामवासना अधिक है,पुरुष के हाथ में लाल हो गयी है और स्त्री के हाथ में नही तो स्त्री रति सम्बन्धी कारणों से ठंडी है,और संतान पैदा करने में असमर्थ है,कुछ समय के लिये रति क्रिया को बंद कर देना चाहिये।

Unless otherwise stated, the content of this page is licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 3.0 License