मेष लगन के रोग

कारकता

मेष लगन कालपुरुष से सम्बन्धित सिर से सम्बन्धित लगन है सिर बालो का हिस्सा माथे का हिस्सा सिर आगे पीछे का हिस्सा आता है। मेष लगन के लिये रोगो का कारक बुध होता है और गोचर से बुध जहां जहां जाता है उसी प्रकार के रोग पैदा करता जाता है जिन लोगो की कुंडली मे बुध और मंगल की युति होती है वे सिर दर्द के मरीज होते है उन्हे सिर के दर्द से हमेशा कोई न कोई परेशानी बनी रहती है। रोजाना की जिन्दगी मे अपनी बातो से ही वे कई प्रकार के रो पाल लेते है और जुबानी कारणो के अलावा उनके लिये नौकरी करना धन की चिन्ता करना सन्तान के लिये पुरुष सन्तान और और सन्तान के जीवन साथी से सम्बन्धित कारणो से जूझते रहना भी होता है। प्राथमिक समय से ही जातक को सर्दी वाले रोग तभी परेशान करते है जब सितम्बर का महिना आता है और इसी प्रकार के रोग अगस्त के तीसरे सप्ताह से शुरु हो जाते है। बुध का रोग का कारक होने के पीछे एक बात और भी मानी जाती है कि मेष लगन के जातक की कुंडली के अनुसार बुध जीवन साथी के भाव का भाग्य और बारहवे भाव का भी मालिक होता है इस प्रकार से जीवन साथी की बेलेन्स करने की क्षमता से और किसी भी काम के अन्दर देर होने से अक्सर इनका स्वभाव चिढचिढा भी हो जाता है शुक्र का प्रभाव धन और जीवन साथी दोनो के लिये अपनी युति को प्रदान करता है इस प्रकार से जो कारक जातक मे होते है उसके विपरीत कारक जीवन साथी मे देखे जाते है।

बचपन के रोग

मेष लगन का जातक बचपन से ही दुखी माना जाता है जैसे वह जब बोलने की क्षमता का विकास करता है तो उसके लिये हकलाहट या रुक रुक कर बोलने की आदत से भी जूझना पडता है किसी प्रकार से अगर जरा सा चूक जाये तो उसे जंगली जानवर के काटने से भी हानि होती है अगर राहु कही चौथे भाव मे है तो वह पैदा होने के कुछ समय बाद ही अटैक करता है। जैसे चूहा आदि के द्वारा उसे हमेशा परेशानी होती रहती है। बचपन मे जातक को पिता की आर्थिक स्थिति से भी जूझना पडता है और पिता के रहते हुये उसे बहुत काम करने पडते है लेकिन माता का सहयोग उसे हमेशा बचपन के लिये पालन करना और शिक्षा आदि का माता की योग्यता के अनुसार देखा जाता है। इसी प्रकार से जातक को प्राथमिक शिक्षा मे भी याददास्त की कमी या बहुत अधिकता के कारण एक से अधिक विद्यालय बदलने का कारण भी मिलता है। नाक के रोग वायु सम्बन्धी परेशानी पैरो मे नसो के रोग नाखून आदि का बढना भी देखा जाता है।

जवानी के रोग

जातक के जवान होते ही जातक को कामुकता की अधिकता से जूझना पडता है कारण मंगल एक तो लगन का मालिक होता है वही मंगल जननांगो का मालिक होता है जातक जो भी चाहता है वह अपने शरीर के बल के अनुसार प्राप्त करना चाहता है और विपरीत लिंगी के प्रति अधिक आकर्षण होने से बडी से बडी कठिनाई से जूझने की हिम्मत भी रखता है कभी इसी कारण से रक्तपात आदि जैसी बाते होती देखी गयी है। मेष लगन के जातक को जवानी मे अपने को समर्पित करने की एक प्रकार की आदत होती है जिसका फ़ायदा जातक के दोस्त और विपरीत लिंगी भी उठाते है उससे अपने काम को निकालने के बाद उसे उसी प्रकार से त्याग देते है जैसे पत्तल मे खाना खाने के बाद उसे त्याग दिया जाता है इस प्रकार से जातक को मानसिक और शारीरिक दिक्कत के साथ साथ दगाबाजी का कारण भी भुगतना पडता है। सन्तान के कारको मे भी जातक को शादी के बाद अधिक कामुकता के कारण दिक्कत का कारण उठाना पडता है.मेष लगन के जातको को अक्सर सेना रक्षा सेवा होटल अस्पताल आई टी तकनीकी सेवा आदि के क्षेत्र मे सेवा मे जाना पडता है और जो भी शरीर से और बल से किये जाने वाले काम होते है उन्हे ही करना होता है इस प्रकार से जातक को अपने शरीर से अधिक मेहनत करने के बाद ही परिवार आदि की जिम्मेदारी से निपटना पडता है जो जातक के लिये बुढापे मे दिक्कत देने वाले बन जाते है।

बुढापे के रोग

जातक का जवानी के समय मे अधिक मेहनत करने और कामुकता की अधिकता से जननांग की बीमारिया अधिक होती है जब जब जीवन मे राहु अष्टम मे गोचर करता है तब तब जातक कामुकता की अधिकता से अपने को ग्रस्त पाता है और इसी कामुकता की बजह से जातक को यौन रोग होने लगते है जो खाज खुजली सहित कई प्रकार के बडे रोग भी देखे जाते है इसके अलावा भी मेहनत वाले काम करने दिमाग को अधिक खर्च करने के कारण जवानी मे की ऊर्जा की उपयोगिता के कारण बुढापे मे आंख आदि के काम नही करने से तथा एक ही स्थान पर पड जाने के कारण हाथ पैरों मे कमजोरी की बीमारिया लकवा चलने फ़िरने मे दिक्कत अंगो के जोडो की बीमारियां भी देखी जाती है।

अन्य ग्रहो से मिलने वाले रोग

जातक के छठे भाव मे जो भी ग्रह होता है उसी प्रकार के रोग और भी जातक को परेशान करते है जैसे राहु के होने से काम मे असफ़लता और चिन्ता वाले रोग केतु के बैठ जाने से शरीर के जोडो की बीमारिया शनि के बैठ जाने से पीठ और रीढ की हड्डी के रोग दाहिने तरफ़ के कन्धे के रोग पाचन क्रिया मे कमी होना बैचैनी होना शरीर मे सुस्ती का बना रहना शुक्र के होने से पत्नी या पति से सम्बन्धित रोग मानसिक लगाव की कमी से और लोगो के प्रति अधिक उकसाने से शरीर मे जोखिम लेने वाले कारण गुरु के होने से वायु वाले रोग पीलिया पुट्ठो में चिलक वाले रोग बुध के होने से दांतो की बीमारिया स्नायु रोग खुशबू बदबू का पता नही चलना मंगल के होने से खून वाले रोग जमाने से दुश्मनी लेने से आघात करने वाले कारण जलने या छिलने से मिलने वाली आफ़ते चन्द्रमा से कार्य का प्लान बनाकर नही होने से असफ़लता के कारण होने वाली चिन्ता पानी वाले रोग नाभि की बीमारिया सूर्य के होने से हड्डी के रोग पिता से सम्बन्धित तकलीफ़ो से होने वाले कारण आदि रोग देखे जाते है।

मेष राशि को निरोगी बने रहने के उपाय

मेष राशि के जातक को राहु का बहुत ध्यान रखना चाहिये जब भी राहु अष्टम मे आये तो जातक इन्फ़ेक्सन वाले कारणो से दूर रहे साथ ही किसी भी जोखिम के काम को वीराने या तंत्र आदि के कारणो मे नही जाये इसके साथ ही भीड भाड वाले क्षेत्र जहां बदबू का अधिक होना कचडे या भंडार करने वाले स्थान आदि से अपने को दूर रखना जरूरी हो जाता है इसके अलावा जैसे ही राहु अष्टम मे आता हो फ़ौरन राहु के तर्पण आदि का बन्दोबस्त कर लेना चाहिये अपने पूर्वजो के प्रति आस्था रखकर चलना चाहिये यह राहु छोटे भाई बहिन के लिये भी और खुद के मुंह आदि के लिये भी अपनी दिक्कत देने के लिये भी माना जाता है.सन्तान आदि के पैदा होने के बाद इन्फ़ेक्सन आदि के कारण सन्तान से हाथ भी धोना पड सकता है आदि कारणो से बचकर रहना चाहिये.अलावा जानकारी के लिये लिख सकते है moc.liamg|airuadahbortsa#moc.liamg|airuadahbortsa

Unless otherwise stated, the content of this page is licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 3.0 License