Mantra Chanting (मंत्र जाप अर्थ और प्रयोजन)

आंखो से दिखाई देना नाक से खुशबू बदबू का पता लगना मस्तिष्क को वातावरण के अनुसार तापमान को कायम रखना कान से सुनना और सुषुम्ना को जलवायु के अनुसार केन्द्रित रखना मुंह से भोजन लेना जीभ से स्वाद चखना गले तालू होंठ दांत से पंच तत्व वाले शब्दो का उच्चारण करना और शरीर को उसी प्रकार से प्रोग्राम करना जैसे कम्पयूटर को की बोर्ड से प्रोग्राम किया जाता है। विभिन्न मंत्र शक्तियों पर आधारित है,प्रत्येक शक्ति का एक निश्चित नियम होता है और निश्चित संख्या मे नाम लेना उस शक्ति के बीज को गले तालू जिव्हा होंठ और दांतो की सहायता से पंच तत्व के अन्दर उनकी मात्रा को घटाना या बढाना आदि बाते मानी जाती है। रामेन्द्र सिंह भदौरिया के नाम कई प्रकार और भी उपाय आदि लिखे गये है और उन्हे समझाने की कोशिश की गयी है इसके लिये गूगल के ब्लाग मे astrobhadauria सर्च करने के बाद काफ़ी मात्रा मे आपको मिल सकते है।

मंत्र उनके अर्थ और प्रयोजन

मंत्र कारक नाम जाप संख्या मंत्र का प्रयोजन मंत्र का अर्थ और प्रयोग करने की विधि
ऊँ तारा तारिणी तारामंत्र ब्रह्मविद्या 300000 प्रयोजन- सिद्धावस्था,अर्थ- भव बन्धन से मुक्ति एवं ब्रह्म की प्राप्ति
क्रीं क्रीं क्रीं सरस्वती मंत्र 300000 प्रयोजन वाणी,अर्थ वाणी पर अधिकार
हूं हूं त्रिशक्ति मंत्र 300000 प्रयोजन-लक्ष्मी वाणी सौन्दर्य और प्रसिद्धि,अर्थ- नियंत्रण शक्ति
ह्रीं ह्रीं त्रिशक्ति 300000 प्रयोजन-राज्य,अर्थ-शत्रु पर विजय
दक्षिण कालिके काली प्रत्यांगिरा 300000 प्रयोजन-अष्ट सिद्धि,अर्थ-सर्वकामनाओं की प्राप्ति
ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा गुह्य काली गुह्य लक्ष्मी गुह्य तारा 300000 प्रयोजन-सकल सिद्धि अर्थ-पराशक्ति की पूजा
क्रीं मुण्डस्त्रगतिशयलसत रूप लक्ष्मी 300000 प्रायोजन- सौन्दर्य एवं वाणी,अर्थ-वाणी मे मोहिनी शक्ति और सुन्दरता की प्राप्ति
ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धि पुष्टिवर्धनम।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात॥ रुद्र मंत्र 300000 प्रायोजन-शरीर को सडने से बचाना मौत के चिन्हो को समाप्त करना,अर्थ-शिवजी अर्थात रुद्र की पूजा करते है जो दुर्गन्ध को हटाने वाले बल को प्रदान करने वाले और रोग एव मौत को इस प्रकार से निकाल बाहर कर देते है जैसे सांप अपनी केंचुली को हटाकर नया शरीर प्राप्त करता है (उड्डीस तंत्र 94)
ऊँ सं सां सिं सीं सुं सूं सें सैं सों सौं सं स: वं वां विं वीं वुं वूं वें वैं वों वौं वं व: हं स: अमृतवर्चसे स्वाहा रोगहर 108 प्रयोजन- रोगों का इलाज दुष्कर्मों के हानिकारक परिणाम को हटाना,अर्थ- एक पीतल के कटोरे मे शुद्ध पानी लेकर अनामिका उंगली उस पानी मे डाल कर पानी को अभिमंत्रित करने के बाद सुबह सबसे पहले पी जाना चाहिये,यह प्रयोग लगातार 108 दिन का है
ऊँ हं हां हिं हीं हुं हूं हें हैं हों हौं हं ह: क्षं क्षां क्षिं क्षीं क्षुं क्षूं क्षें क्षैं क्षों क्षौं क्षं क्ष: हं सं हम आपच्छान्ति 300000 यह मंत्र भूत प्रेत पिशाच आदि की शक्ति को किसी के द्वारा किये गये दुराचरण आदि से मिलने वाले प्रभावों तथा जहर के जहरीले प्रभाव को दूर करने के लिये है
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