लालकिताब

लालकिताब के अनुसार एक साधारण जानकार भी अपनी जन्म कुंडली को पढ सकता है अथवा जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली नही बनी हो वह भी अपने परिवार की स्थिति को देखकर अपनी जन्म कुंडली और जीवन के बारे मे अध्ययन कर सकता है। वैसे तो कई प्रकार की लाल किताब लिखी गयी है लेकिन पिछले पच्चीस साल के ज्योतिषीय अध्ययन से जो रूप लालकिताब का सामने आया है वह कई प्रकार के समय समय के बदलाव से जुडा हुआ है कई लेखक अपनी अपनी विचारधारा से लालकिताब के लेखो को अपने अनुसार विच्छेदित करने के बाद अपनी बुद्धि से बताने के प्रयास मे रहे है और कई तो इस क्षेत्र मे भी अधिक से अधिक आगे बढते गये लेकिन उनके लिखे गये पाठ्य ग्रंथो को कोई कोई ही समझ पाया है। लाल किताब की जानकारी करने के लिये सबसे पहले ज्योतिष के मुख्य और प्रारम्भिक अध्ययन को करने का प्रयास करना चाहिये,जब तक ज्योतिष की प्रारम्भिक जानकारी नही की जायेगी लाल किताब भी समझ मे नही आयेगी ऐसा मेरा मानना है। वैसे मैने काफ़ी ब्लाग गूगल पर भी लिखे है और हिन्दी की विकीपीडिया पर भी लिखे है आप आस्ट्रोभदौरिया के नाम हिन्दी और अंग्रेजी मे खोज कर पढ सकते है।

लालकिताब और राशियां

वैसे लाल किताब मे एक ही सिद्धान्त होता है कि राशि को महत्व नही दिया गया है लाल किताब मे केवल भावो का अर्थ ही आजीवन के लिये प्रस्तुत किया गया है। ग्रहो क भावो के अनुसार मान्यता दी जाती है और कौन सा ग्रह किस घर यानी भाव मे है उसका रूप लाल किताब मे बताया जाता है। वैसे साधारण ज्योतिष मे राशियों को महत्व दिया गया है धनु मीन गुरु की राशिया है इसलिये इन्हे ब्राह्मण वर्ण की संज्ञा दी गयी है मेष वृश्चिक मंगल की राशि है इसलिये इन्हे क्षत्रिय वर्ण की उपाधि दी गयी है वृष और तुला शुक्र की राशिया है इसलिये इन्हे वणिक वर्ण की उपाधि दी गयी है कन्या और मिथुन बुध की राशिया है इसलिये इन्हे शूद्र यानी सेवा वाले वर्णो की उपाधि दी गयी है कर्क और सिंह यह सामाजिक और राजनीतिक राशिया है इसलिये इनके अन्दर सभी वर्ण अपने अपने अनुसार समुदाय समाज आदि बनाकर चलने के लिये बताये गये है.यह भी जरूरी नही है कि ब्राह्मण के घर मे ब्राह्मण ही पैदा हो अगर उसके घर मेष या वृश्चिक लगन का जातक पैदा हो गया तो मान लेना चाहिये कि बाप तो वैश्य था लेकिन लडका क्षत्रिय हो गया है और जो भी गुण दोष आदि होंगे वह एक क्षत्रिय के ही होंगे आदि बाते जानकारी के लिये काफ़ी है.

लालकिताब और ग्रह

लालकिताब मे ग्रहो की मान्यता शक्ति के अनुसार बतायी गयी है जैसे सूर्य को पिता और पुत्र की उपाधि दी गयी है चन्द्रमा को माता की दादी की नानी की चाची की ताई की मामी की मौसी की बडी बहिन की आदि भावो के अनुसार उपाधि दी जाती है मंगल को भी अलग अलग भावो के अनुसार अलग अलग प्रकार के भाइयों की संज्ञा दी जातीहै जैसे लगन का मंगल खून का भाई दूसरे भाव का मंगल बडा भाई तीसरे भाव का मंगल पिता का छोटा भाई चौथा मंगल ममेरा भाई पंचम मंगल माता का बडा भाई छठा मंगल मौसेरा भाई और सप्तम का मंगल दूसरा भाई या पत्नी का भाई अष्टम मंगल ताऊ का लडका नवा मंगल दादा खानदान का भाई दसवा मंगल पिता के बडे भाई का लडका ग्यारहवा मंगल पत्नी की माता का बडा भाई बारहवा मंगल ममेरा भाई आदि माने जाते है उसी प्रकार से बुध के रूप भी भाव के अनुसार बदलते जाते है जैसे लगन का बुध इकलौती बहिन दूसरे भाव का बुध माता के मामा की लडकी तीसरे भाव का बुध छोटी बहिन चौथे बुध के लिये माता की बदी बहिन पंचम के अनुसार खुद की लडकी छटे बुध से मौसी की लडकी सप्तम बुध से साली या ननद अष्टम बुध से ताई की लडकी नवम बुध बुआ के लिये दसवा बुध पिता की बडी बहिन ग्यारहवा बुध बडी बहिन बारहवां बुध मामा की लडकी आदि जैसी बाते मानी जाती है उसी प्रकार से गुरु के मामले मे जाना जाता है गुरु लगन का जातक के लिये खुद का प्रमाण होता है दूसरे भाव का गुरु दूसरे भाई के लिये तीसरे भाव का गुरु जातक के छोटे भाई के लिये चौथा गुरु पिता के लिये और पंचम गुरु शिक्षा देने वाल मास्टर के लिये छठा गुरु जो समय पर उधार देने वाले कारण पूरे करे सप्तम गुरु स्वसुर से भी और जीवन साथी के द्वारा अपनाये जा रहे धर्म से भी माना जाता है वही अष्टम गुरु शमशानी गुरु की उपाधि मे चला जाता है या पिता के बडे भाई के बाद जो सम्पत्ति मरने के बाद मिलती है को दर्शाता है खुद के द्वारा जमा किया धन जो हर बारह साल मे अपनी पूर्ति करता है बीमा की किस्त आदि के बारे मे जाना जाता है इसी प्रकार से नवम गुरु धर्म गुरु के लिये भी माना जाता है इसी प्रकार से अन्य ग्रहो के लिये भी माना जाता है।

ग्रहों की प्रकृति

ग्रहो को समझने के लिये जो नियम है वह इस प्रकार से है सूर्य उजाला देता है गर्मी देता है चन्द्रमा धरती और धरती पर पानी की मात्रा को बताता है मंगल हिम्मत और पराक्रम का मालिक है बुध जातक के जीवन मे अपने कार्य और व्यवहार से फ़ैलने की बात करता है गुरु हवा के रूप मे है रिस्ते जोडता है और रिस्तो की दुहाई भी देता है शुक्र जमीन के नीचे की शक्ति है धातु के रूप मे सोना है तो पत्थर के रूप मे जवाहरात है शनि अन्धेरा भी है और ठंडा भी है राहु मित्र के साथ मित्र है और शत्रु के साथ शत्रु है कभी कभी खुद की जड भी उखाडने का काम करता है केतु शुक्र का सहायक ग्रह माना जाता है जैसे धरती को खोदने के लिये केतु की जरूरत पडती है फ़सल को पैदा करने के लिये हल की जरूरत पडती है सन्तान क पैदा करने के लिये पुरुष के जननांग की जरूरत पडती है.

ग्रहो के शत्रु और मित्र ग्रह

सूर्य के मित्र गुरु और मंगल है चन्द्रमा सम है चन्द्रमा के लिये सभी मित्र शत्रु भी है मित्र भी है और सभी सम भी है मंगल के लिये बुध और शुक्र दुश्मन है बुध के लिये मंगल ही शत्रु है बाकी के सभी सम है गुरु के लिये शुक्र और चन्दमा शत्रु है शुक्र के लिये मंगल और गुरु शत्रु है शनि के लिये मंगल और सूर्य शत्रु है आदि बाते समझनी चाहिये.

ग्रहो के फ़ल सुधारने के लिये लाल किताब के उपाय

लालकिताब का प्रसिद्ध होना केवल इसी बात पर निर्भर है कि लालकिताब के अन्दर सभी ग्रहो का इलाज दिया गया है,आस्तिक है उनके लिये भी और नास्तिक है उनके लिये भी,लालकिताब का वास्तविकता को भारतीय व्यक्ति ही समझ सकता है इसके अलावा एक बात और भी मेरे देखने मे आयी है कि जिसका शनि और गुरु या बुध वक्री है वह किसी प्रकार के सामाजिक कानून को धर्म को मर्यादा को जाति को व्यवहार को समझना तो दूर एक सिरे से ही साफ़ करता हुआ देखा जा सकता है इसी प्रकार से राहु से ग्रसित व्यक्ति भी अगर कोई उसका सहायक नही है तो वह किसी के भी कहने मे नही आने वाला अगर जबरदस्ती उसके साथ लालकिताब या ग्रह के इलाज करवा दिये जाये तो वह ठीक हो तो दूसरी बात है नही तो इलाज बता भी दिया जायेगा तो वह अपने कनफ़्यूजन के कारण इलाज नही कर पायेगा.

सूर्य का इलाज

लालकिताब मे सूर्य के खराब होने के जो कारण बताये गये है वह इस प्रकार से है अगर व्यक्ति का सूर्य खराब होता है तो सबसे पहले वह ह्रदय पर असर डालता है और दिल की चलने वाली धडकन को बाधित करता है या तो अधिक चिन्ता के कारण यह होता है या अधिक खुशी गमी मे ह्रदय की चाल का बिगडना माना जाता है वैसे देखा जाये तो एक आदमी औसतन एक मिनट के अन्दर पन्द्रह सांस गिनती से लेता है इन सांसो की चाल धीरे धीरे चिन्ता या शोक या खुसी गमी मे बदलने लगती है जैसे ही सांसो क चाल अपनी गति को बदलती है धीरे धीरे शरीर के रक्त प्रवाह मे कमी बेसी आने लगती है और सीधा सा प्रभाव ह्रदय की रक्तवाहिनी नशो पर पडता है वास्तविकता मे ह्रदय के रोग शुरु हो जाते है खून जाम होने लगता है या खून का प्रेसर अधिक बन जाता है तो हाई ब्लड प्रेसर बन जाता है और धीरे चलने पर लो ब्लड प्रेसर की बीमारी शुरु हो जाती है,इसके बाद पेट की खराबिया भी शुरु हो जाती है भोजन पचता नही है पचता भी है तो वह भोजन के शरीर को लगने वाले तत्व नही प्रदान कर पाता है या तो भोजन का समय ही बदल जाता है या शरीर की मेहनत करने और मेहनत के बाद भूख का ख्याल नही रखा जाता है आराम या तो बहुत शरीर को मिल जाता है या शरीर को बिलकुल ही आराम नही मिलता है किसी प्रकार की चिन्ता के कारण लोगो के मान अपमान की चिन्ता बच्चो के शादी विवाह की चिन्ता घर मे बरक्कत की चिन्ता राज दरबार से मिलने वाली चिन्ता या किसी प्रकार के गलत काम हो जाने से सजा या बदनामी की चिन्ता चोरी डकैती फ़सल वाहन आदि के समाप्त होने की चिन्ता मे व्यक्ति दिक्कत मे आजाता है जैसे ही चिन्ता लगती है अक्समात ही आंखो पर भी असर जाता है जैसे पुत्र की मौत हो जाना पिता के द्वारा बडी बीमारी का झेलना या रोजाना के कामो मे सरकारी रुकावट का आजाना सामाजिक रूप से किसी बडे कष्ट का बन जाना मान अपमान हो जाना,आदि बातो से आंखो की रोशनी जाने लगती है इसके अलावा भी यह देखा जाता है कि किसी प्रकार से अनैतिक रिस्तो के बनते ही ताकत और शरीर का सूर्य जो वीर्य और रज के रूप मे होता है बेकार मे बहा दिया जाना आदि भी बात मानी जा सक्ती है,अच्छा खासा धन कमाया जा रहा था अचानक सरकारी कानून बना और धन कमाने का रास्ता साफ़ हो गया जो प्लान कल के लिये बनाये गये थे सभी उस रुकावट के कारण समाप्त हो गये आदि बाते धन की चिन्ता के लिये माने जाते है इसी प्रकार से अपयश होना जो प्रसिद्धि बनी थी वह बिगडने पर भी सूर्य का खराब होना माना जाता है वैसे दांतो की तकलीफ़ होना मुंह से लार का अधिक आना घर मे लकडी आदि का लगा सामान जल जाना खराब हो जाना दीमक के द्वारा खराब कर दिया जाना आदि बाते भी सूर्य के खराब होने के लिये मानी जाती है इसके लिये सबसे पहला उपाय होता है शराब कबाब मांस आदि के भोजन बन्द कर देना,अधिक मनोरंजन और अनैतिक लोगो का साथ छोड देना फ़िर सूर्य की पूजा के लिये रोजाना सुबह सूर्योदय पर सूर्य को अर्घ देना हरिवंश पुराण का पाठ करना पिता की सेवा करना पूर्वजो के प्रति श्रद्धा रखना उनके लिये तर्पण आदि काम करना लकडी और उसके काटने छांटने के काम बन्द कर देना जंगल आदि से प्राप्त सामग्री को व्यापार मे नही लाना पुत्र की संगति को अच्छा बनाने के लिये स्थान का बदलाव कर देना नौकरी मे अडचन आ रही है तो कोयले बहते पानी मे बहाना कोयले नही मिले तो गेंहू की चापड को बहते पानी मे बहाना भूसा और खली मिलाकर जानवरो को चारा डालना लोगो के ठहरने के लिये छाया वाले कारण पैदा करना यह सब कार्य राहु को सुधारने के लिये किये जाते है सूर्य तभी खराब होगा जब राहु अपना ग्रहण दे रहा होगा शनि सूर्य की युति मे केवल बाप बेटे की नही बनेगी लेकिन शरीर का अहित नही होगा,आदि बाते ध्यान मे रखकर करनी चाहिये.

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