जन्म लगन और स्वभाव

जातक के जन्म के समय मे जो लगन आकाश मे उदित होती है उसी के अनुसार जातक का स्वभाव होता है विभिन्न ग्रंथो मे विभिन्न प्रकार के कारको का विश्लेषण किया जाता है लेकिन लगन लगनेश चन्द्र लगन और चन्द्र लगनेश के साथ सूर्य लगन और सूर्य लगनेश की स्थिति के अनुसार ही जातक के बारे मे समझना जरूरी होता है केवल एक लगन के भरोसे से पूरे जीवन का बखान नही किया जा सकता है,लाल किताब सहित विभिन्न ग्रंथो के अनुसार लगन का कैसा महत्व है वह संक्षिप्त रूप मे नीचे लिखा जा रहा है।

मेष लगन स्वामी मंगल सकारात्मक

मेष लग्न वालों को खाने में मीठी चीजें बहुत पसंद होती है,आत्मविश्वास की कमी नही होती है,शरमाना या झिझकना इनका स्वभाव नही होता है। तथा लंबे समय तक अपनी रुचि को एक विषय या वस्तु पर केन्द्रित नही रख पाते । मेष लग्न वालों की गर्दन लंबी होती है,मेष राशि का सिर और चेहरे पर अधिकार है इसलिये चेहरे से विशेष शक्ति का आभास होता है। सिर का हिस्सा कनपटी के स्थान पर चौडा होता है और ठोढी के स्थान पर थोडा तंग हो जाता है। कद दर्म्याना होता है,मेष लग्न वालों की एक पहचान यह भी होती है कि उनकी भोंहों के बाल बहुत घने होते है। चेहरे पर या सिर पर तिल मस्सा या चोट का कोई निशान होता है। इस लग्न को और ध्यान से समझने के लिये हमे इस राशि के प्रतीक मेढा के कल्पना करनी चाहिये। उसके शरीर में उसका सिर सबसे अधिक शक्तिशाली अंग है,जिससे वह अपने आपको हर खतरे से बचाता है,और मुश्किल की हर दीवार को अपने सिर तोड देता है,यहां यह भी समझना जरूरी है कि बहुत से धार्मिक अवसरों पर मेढे की बलि चढाई जाती है। शायद मेष राशि में अपने आपको किसी विशेष उद्देश्य के लिये कुर्बान करने की शक्ति का होना भी इसी कारण से है। मेष लग्न नववर्ष के आरम्भ होने का प्रतीक है,जो गेंहूं की फ़सल का बीज भूमि के गर्भ में अपनी बलि देकर नये पौधे को जन्म देता है उसकी फ़सल सूर्य के मेष राशि में आने पर बैसाख अप्रैल के मध्य भाग में पककर तैयार हो जाती है। यह मेष लग्न पूर्व दिशा का कारक है,यही कारण कि सूर्य मेष में उच्च का हो जाता है। पतांजलि के योग शास्त्र मे अनुसार सात चक्रों में से स्वधिष्ठान चक्र का स्थान हमारे शरीर में नाभि से नीचे है। हमारे शास्त्रों के अनुसार इस चक्र में दस पत्तियां है,बच्चे के जन्म के समय जब वह मां के गर्भ से बाहर आता है,तो उसका नाडुआ काटा जाता है,नाडुआ बच्चे की नाभि स्थान है,अर्थात स्वाधिष्ठान के पास का स्थान है,नाडुआ काटने के बाद यह बच्चे का स्वतंत्र रूप से संसार में प्रवेश पाने का क्षण है मेष राशि स्वधिष्ठान चक्र की कारक है। स्वधिष्ठान चक्र हमारी उन आंकांक्षाओं का वह अंतर्स्थान है जहां हम केवल चाहते है परंतु उस चाहत का लाभ या हानि नही सोचते यह भी नही जानते कि हमने ऐसा क्यों चाहा ? दूसरे शब्दों में मेष लग्न में मिश्रित भावनाओं का अनुभव होता है। एक बच्चा आधी रात को आम खाना चाहता है,घर में आम नही है लेकिन उसे इस तथ्य से क्या लेना देना है,मेष लग्न का व्यक्ति अपनी इच्छा की पूर्ति चाहता है,और उसके लिये कुछ भी प्रयास करने को तैयार है। इसीलिये जिस इच्छा की पूर्णता के लिये वह चेष्टा करता है शायद वह उतनी महत्वपूर्ण नही होती है और उसकी प्राप्ति के बाद उसे अक्सर महसूस होता है कि उसे उस वस्तु की विशेष आवश्यकता नही थी। मेष राशि के लोगों के जीवन में बहुत जोश के साथ आरंभ किये कार्य कुछ समय के बाद अपने छूट जाते है,और उनके जीवन की बहुत सी उपलब्धियों पर धीरे धीरे समय की धूल पडती रहती है। वह थोडा समय लगने वाले प्रत्येक कार्य को दूसरे लग्नों की तुलना में बहुत बेहतर और पूरी शक्ति लगाकर कर सकते है। किंतु लंबे समय तक अपने शौक को कायम रखना उनके वश की बात नही होती। वे बहुत अच्छे मुक्केबाज फ़ुटबाल के खिलाडी या वेट लिफ़्टर हो सकते है लेकिन शतरंज या क्रिकेट खेलना उनके स्वभाव के अनुकूल नही होता है।

चीन के ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष राशि को ड्रेगन कहते है ड्रेगन चीन के मिथिहास के अनुसार बादशाह या संपूर्ण पुरुष जाति का प्रतीक है,यह दोनों प्रतीक शक्ति के रूप है,शायद यही कारण है कि यह लोग प्रत्येक वस्तु को शाही ढंग से या बहुत बडे पैमाने पर करना चाहते है। इस लग्न के व्यक्तिओ जहां चीन के ज्योतिष में बादशाह या संपूर्ण पुरुष का प्रतीक कहा वहां भारतीय मिथिहास में इस लग्न को समझने के लिये हनुमान जी की कल्पना करें। क्योंकि मेष राशि का स्वामी मंगल है और मंगल के इष्ट हनुमानजी है,जो अपने जोश मे संजीवनी बूटी लाकर मृत लक्ष्मण को जीवित करते है। कई बार किसी परिस्थिति को बुद्धि की बारीकी से सुलझाने के बजाय अपनी असीमित शक्ति को पहले ही निर्धारित कर लेते है,और कार्य आरंभव करने से पूर्व ही उनके अंदर जोश इतना ज्यादा संचार में आजाता है कि उनकी आग की तरह जल रही इच्छायें धुंये में बदल जाती है,यदि वे अपने असीम उत्साह को काबू करने की आदत डाल सकें तो उनके जीवन में प्राप्ति का स्तर बहुत ऊंचा हो सकता है। अगर उन्हे किसे एयोग्य आदमी की राय मिलती रहे तो उनके उत्साह की अग्नि मुश्किल के हर बीहड जंगल को जलाकर अपना रास्ता साफ़ कर लेगी। इसके विपरीत यदि मेष लग्न वाला अपने जोश को काबू में नही रखता किसी योग्य व्यक्ति से सलाह नही लेता तो यह आग उसके निजी जीवन को जलाकर राख कर देगी। यहां पर इस बात को याद रखना चाहिये कि वह किसी भी राय को तभी स्वीकार करेगा जब यह सलाह चीनी की चाशनी में लिपटी हुयी हो। यदि राय हुकुम के रूप में आये तो वह उसे कभी स्वीकार नही करेगा। हुकुम शब्द से ज्यादा शायद किसी और चीज से उसे घृणा नहीं।

मेष लगन वाले व्यक्ति को पहचानने के लिये आप उस आदम की कल्पना कीजिये जो स्वर्ग में शांतिपूर्वक रह रहा था। जब उसको ईश्वर ने यह आज्ञा दी कि इस फ़ल को मत खाना तो आदम ने वही फ़ल खाया और आगे के परिणाम तो हम सबको मालुम है। मेष लगन वाले के लिये वर्जित फ़ल को खाना उसके अंत:करण की जरूरी आवश्यकता है। मेष लगन का व्यक्ति एक बच्चे की तरह से पूरा नंगा है। वह एक जीता जागता सच है,उसके लिये समाज की गहरी कूटनीतियां कोई मायने नही रखती है। यही वजह है कि वह अपने जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में आसानी से समझौते नही करता। उसके स्पष्टवक्ता होने के कारण अपने परिवार के वुयक्ति मित्र उसके बेबाक स्वभाव से घबडा जाते है,इस तरह दूसरों के साथ रिश्तों में कई बार दरार आजाती है। जिसका उसको जीवन में पश्चाताप अवश्य होता है पर उसको यह समझ में नही आता कि उसने ऐसा क्या कर दिया कि दूसरे लोग नाराज हो गये। वह अपनी कल्पनाशीलता की दुनियां में अपने आप यह विश्वास रखता है कि वह जो भी कहता है वह सदा सही होता है। उसका अहम यह नही मान सकता है कि वह गलत भी हो सकता है। मेष अग्नि तत्व की राशि है,मेष लगन वालों के लिये यह जरूरी है कि वह हमेशा कोई उद्देश्य सामने रखकर उससे जूझते रहें। यह जूझना ही उनके जीवन में खुशी और अच्छे स्वास्थ्य का कारण बनता है। समस्याओं को सुलझाने में लगाई गयी शक्ति ही उनकी अंदरूनी आग का ईंधन है जिससे यह आग हवनकुंड की पवित्र ज्वाला की तरह जलती रहती है। यदि उसके सामने कोई निश्चित लक्ष्य न हो तो यह आग उसे अपने आपको जलाने लगती है। जिसके फ़लस्वरूप उसे छोटी छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है। कुछ परिस्थितिया में सर दर्द या रक्तविकार भी पैदा होने लगते है।

वृष लगन स्वामी शुक्र

वृष लगन के बारे मे ज्योतिषियों के विचार आपस मे बहुत मतभेद रखते है। इन मतभेदो का होना वास्तव मे ठीक भी लगता है। वृष लगन एक रूप से गुस्से से आग बबूला हुआ ऐसा सांड है जो अपने शत्रु का बीज नाश तक करने के लिये तैयार है और दूसरी तरफ़ यह शिवजी का वाहन नंदी बैल है जो अपनी मस्ती मे झूमता हुआ चलता है,लेकिन जल्दी से कहीं पहुंचने की उसे कोई चिन्ता नही है,कहा जाता है कि शिवजी के ससुर जिनका नाम दक्ष थावह एक बार शिवजी से खुश होकर उन्हे कुछ भेंट करना चाहते थे। अब भोलेनाथ को कौन सी वस्तु भेंट की जाये यह सोच पाना उनके बस की बात नही थी,सुन्दर वस्तुओं से शिवजी का कोई विशेष प्रेम भी नही था। और सोना जेवरात भी उनकी नजर मे कोई कीमत नही रखते थे। उनक एलिये गले मे पहने हुये जहरीले नाग ही उनका हार श्रंगार है और वे अपने ही नशे की मस्ती मे झूमते हुये खुश रहते है। बहुत सोच विचार के बाद उनके ससुर ने उनको भेंट के तौर पर एक बैल दिया। इसी बैल का नाम नन्दी था जो शिव का वाहन बना। इसका रूप ऐसा था जैसे सफ़ेद बर्फ़ का कोई सुन्दर बलवान बैल,और जिसके शरीर से शक्ति ही शक्ति फ़ूट रही हो। उसकी गर्दन बहुत मांसल थी और उसके शक्तिशाली सींगो का ऊपर का हिस्सा लाल रंग का था और वे सींग इतने कठोर सख्त जैसे हीरे के बने हुये हों। शिवजी एक महान योगी है और वह जीवन को हर रूप मे भोगना चाहते है इसीलिये यह शिवजी के लिये सबसे अच्छा वाहन था क्योंकि सांड मस्ती और कामुक ऊर्जा का सबसे अच्छा प्रतीक माना जाता है,यह कोई आश्चर्य की बात नही है कि वृष लगन वाले लोगों मे इस प्रकार का स्वभाव पाया जाता है। हमारे ज्योतिष के एक प्राचीन विद्यान श्री हिमाद्री ने अपने ज्योतिष ग्रंथ चतुर्वर्ग चिन्तामणि मे बारह राशियों के प्रतीकात्मक चिन्हों की चर्चा करते हुये लिखा ह कि वृष राशि का आकार ऐसा है जैसे एक सफ़ेद रंग का दूध जैसा आदमी हो किन्तु उसका चेहरा बैल का हो वह लाल कपडे पहने हुये है और उसके एक हाथ मे एक खाली बर्तन इस बात का प्रतीक है कि वृष लगन वाले व्यक्ति अपनी आर्थिक सफ़लता से कभी पूरी तरह संतुष्ट नही होते उनक एलिये धन केवल उनकी जरूरतों को पूरा करने का साधन ही नही है बल्कि धन उनके लिये जीवन का आधार है,उनकी नजर मे इस बात का महत्व अधिक है कि उनके पास क्या है और बहुत हद तक उनके व्यक्तित्व की गरिमा उनके पास होने वाले धन तथा अन्य कीमती चीजों से होती है,इस अर्थ मे शायद यह खाली बर्तन का प्रतीक ठीक है जिसे वे रिरंतर भरने की कोशिश मे रहते है लेकिन फ़िर भी उनको लगता है कि ये खाली का खाली ही है और वे इसे लगातार भरते ही रहना चाहते है। संभवत: यह भी हो सकता है कि वह खाली बर्तन कब का भर चुका हो और उसमे कुछ डालने की गुंजाइस भी न हो मगर वृष लगन वालों को किसी भी प्रकार से मानसिक संतुष्टि नही होती कुछ हद तक भूखी ही रह जाती है।

दूसरे जो उस व्यक्ति के हाथ मे माला का होना दर्शाया गया है वह माला उसके हाथ मे जरूर है,मकर उस माला के द्वारा वह किसी दूसरी दुनिया मे नही पहिंच पाता है और न ही वह इस माला के जाप कर सकता है,लेकिन वृष लगन के हजारो व्यक्तियों मे एक व्यक्ति जरूर इअसा होता है जो अपने अन्तिम समय मे इस माला का प्रयोग कर आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यहां महात्मा बुद्ध का जिक्र करना जरूरी समझता हूँ कहा जाता है बुद्ध वृष लगन मे पैदा हुये उनको इसी राशि मे ज्ञान प्राप्त हुआ और उसी रासि मे उन्होने शरीर का त्याग किया,इसलिये बहुत से उत्सव व पर्व वृष राशि मे ही मनाये जाते है,जब पूर्ण चन्द्रमा और सूर्य वृष राशि से गुजरते है यहां पर कहने का तात्पर्य यह है कि वृष लगन वाला व्यक्ति ज्ञान के शिखर पर पहुंच तो सकता है किन्तु उसके पहुंचने का रास्ता वही हो जो बुद्ध का था। बुद्ध की तरह जीवन के आरंभ से ही सब सुख आराम का भोगना आवश्यक होगा जैसे बुद्ध को बेशुमार धन सुन्दर वस्त्र जेवर भोजन सब कुछ एक शाहना ढंग से प्राप्त था। किन्तु उन्होने सब कुछ भोगने के बाद ही यह जाना कि इस संसार मे भोगों की प्राप्ति का कोई अर्थ नही। वृष लगन वाले व्यक्ति बुद्ध की तरह से अपने जीवन का लक्ष्य तय करते है। लेकिन यहां दिक्कत यह हो जाती है कि वह इस लक्ष्य मे ही इतना उलझ जाते है कि उनको धन की प्राप्ति भोग आदि के जंजाल से बाहर आना मुश्किल हो जाता है,इसीलिये वृष लगन के व्यक्तियों मे पकडी हुयी माला तो बन जाती है लेकिन वह जीवन उच्चतम ज्ञान तक जाने का साधन नही बनती। यह जरूर है कि कभी कभी जब वृष राशि का स्वामी शुक्र गुरु से सम्बन्ध रखता है या गुरु की ही मीन राशि मे उच्च का होता है तो व्यक्ति इस संसार के भोगों को भोग लेने के बाद जीवन को पूरी तरह से जीने के बाद उसके लिये फ़िर ज्ञान की ऊंचाइयों पर पहुंचना असंभव नही होता है। लेकिन इअसे लोगों के साथ मुश्किल यही होती है कि भोग विलास वाले जीवन से उन्हे सन्तुष्टि प्राप्त नही होती और वह वहीं अटके रह जाते है। इसी कारण से वृष लगन क एज्यादातर लोगों के लिये जीवन खाने पीने और भोगने का ही दूसरा नाम होता है। इस तरह के जीवन के श्रेष्ठ ज्ञान यानी अध्यात्म से वंचित ही रहते है। वृश लगन के लोगों मे शारीरिक बल की कोई कमी नही होती है,लेकिन उनका शारीरिक बल उस समय देखने मे आता है जब कोई ऐसा काम करना चाहते है जिसमे उनका कोई विशेष उद्देश्य हो। किन्तु कोई ऐसा काम जो उनके अनुसार नही हो उस वक्त वे बेहद सुस्त और आलसी हो जाते है,उनके जीवन की पूरी शक्ति उसी समय ही अपने उद्देश्य पर केन्द्रित होती है जब उन्हे अपनी इच्छा की पूर्ति के लिये कुछ करने की जरूरत है,या जब उनके सामने किसी प्रकार की चुनौती आती है। फ़िर यही वृष राशि का प्रतीक बैल अपना और ही रूप धारण कर लेता है,आज के स्पेन और पुर्तगाल मे बैलों की लडाई का खेल विश्व भर मे प्रसिद्ध है,इस खेल मे जब कोई दिलेर नौजवान हाथ मे लाल कपडा लेकर बैल के आगे भागता है तो जिस शक्ति से बैल उसके पीछे दौडता है तो मानो वह साक्षात यमराज ही हो। लडते समय इस बैल का सबसे शक्तिशाली अंग उसके सींग है और उसके पांव के नाखून यानी खुर है अपने ख्रों को जमीन मे गाडकर वह जिस ढंग से अपने सींगों का प्रयोग करता है देखने मे लगता है कि जैसे वह एक बैल नही बल्कि जमीन मे धंसे हुये सींग हों और किसी भी शत्रु को पछाडने के लिये गुस्से की लहर से भरा बैल साक्षात यमराज का रूप धारण कर लेता ह।

वृष लगन का शरीर के अंगो से विशेष संबन्ध है बहुत से वृष लगन वालों की गर्दन आमतौर पर मोटी और देखने मे बहुत मजबूत होती है। लेकिन गर्दन का बहुत लंबा होना सामान्यत: कम ही पाया जाता है,कुछ हालतों मे जब वृष लगन पर किसी तरह का बुरा प्रभाव हो तो आमतौर पर ऐसे लोगों को गले से संबन्धित रोग होते है। जब वृष लगन पर शुभ प्रभाव हो तो ऐसे व्यक्ति की आवाज मधुर व मीठी हो सकती है। यही कारण है कि बहुत से गाने वाले लोग प्रायं वृष लगन के पाये जाते है। वृष लगन के लोगों के एक विशेष खासियत यह भी है कि ये लोग अच्छे मेहमाननवाज होते है,घर मे आये हुये मेहमानों की सेवा करना उन्हे बहुत खुशी देता है,किन्तु यहां विशेष बात यह है कि यदि कोई मेहमान उनके घर मे रहने के लिये ही आ गया हो और मेहमान की वजह से उनेह अपना स्थान बदलना पडे तो यह उनके लिये बहुत दुखदायी होता है। कहने का तात्पर्य है कि वृष लगन वाले लोग जीवन मे परिवर्तन से बहुत घबडाते है। उन्हे अपने जीवन के ढर्रे मे बार बार परिवर्तन करना पसंद नही होता है। वृष लगन वल एव्यक्ति अपनी भावनाओं को खिलकर व्यक्त नही करते है इसका कारण यह है कि किसी भी योजना के विचार या भावनायें उनके अन्दर इतनी गहराई मे होती है कि किसी दूसरे के लिये जान पाना असंभव सा होता है। लेकिन भावनाओं के मामले मे ऐसे लोग बहुत सच्चे कहे जाते है उनके नजदीकी वे आ जाते है वह सम्बन्ध लगभग हमेशा के लिये स्थापित हो जाता है,प्रेम सम्बन्धो मे ऐसा व्यक्ति किसी को धोखा नही देता है आमतौर पर ऐसे लोग निष्कपट और निश्छल ह्रदय के होते है एक और बात ऐसे लोगों मे विशेषत: पायी जाती है कि ऐसे पुरुष अपनी पत्नी को और स्त्री अपने पति को जरूरत से ज्यादा अच्छा मानते है बेशक उनमे वे सारे गुण न हों मकर फ़िर भी उनका साथी उन्हे बहुत अच्छा ही समझता है।

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