जीवन में कन्या राशि

अक्षर प कन्या राशि का है। पिता के पानी से पैदा होने के बाद प्राण नाम की वायु जीवन देती है। परिवार की प्राप्ति होती है,पढाई लिखाई होती है प्रेम होता है और परिणय होने के बाद किये जाने वाले कार्यों की प्राप्तियों मे समय निकलने लगता है पुत्र और पुत्रियों की प्राप्ति होती है और एक बडा परिवार बसाने के बात इस जगत से जाने का समय हो जाता है उसे भी प्राणान्त कहते है। पैदा होना परिणय होना और प्राणान्त होना.तीनो ही शब्द कन्या राशि के है। जीवन मे पिता का मान भी कन्या राशि का है जीवन मे कुछ मिले या न मिले पानी के बिना शरीर का रहना मुश्किल है,पानी भी कन्या राशि है,परिवेश के अनुसार पहिचान होती है और परिवेश की जानकारी परिवार देता है। परिणय प्रेम से पहले होता है तो वैवाहिक जीवन नही चल पाने के कगार पर भी आजाता है लेकिन परिणय के बाद प्रेम होता है तो पारिवारिक जीवन बडे प्रेम से चलने लगता है। पुत्र तो आजीवन छाती पर सवार रहता है पुत्री पैदा होने के बाद अपने परिवार मे जाती है और नये नये सम्पर्क बनते है रिस्तेदारिया बनती है,पहिचान नाम भी पुत्री के अनुसार ही चलता है यानी या तो नाम चलावे बेटी या नाम चलावे रोटी,रोटी का नाम तो एक दो दिन चल सकता है बाद मे भूख लगने के बाद रोटी को भूला जा सकता है लेकिन पुत्री को नही भूला जा सकता है। जिस प्रकार से भूमि के लिये पानी जरूरी है तभी फ़सल पैदा हो सकती है वैसे ही परिवार मे बेटी के बिना परिवार की औकात ही नही है। बेटी जिसे कन्या भी कहते है और इसी बेटी के नाम से कन्या राशि का निर्माण हुआ है बुध को स्वामी बना दिया और सेवा वाले कामो से लेकर नौकरी बचत करना धन को धन के द्वारा कमाना आदि सभी काम कन्या राशि के है जिनकी कन्या राशि खराब हो जाती है वे किसी न किसी प्रकार के रोग से पीडित हो जाते है कन्या राशि मे सूर्य बैठ गया तो सेवा तो की जायेगी लेकिन सेवा के अन्दर अहम आजायेगा और उस अहम के कारण जो भी सेवा की गयी थी उसका नकारा होना जरूरी है कारण किसी को पानी पिलाने के बाद कह दिया जाये कि मैने तुझे पानी पिलाया है अगर नही पिलाया होता तो तू मर जाता है या बीमार हो जाता कुछ भी अहम के कारण ही कहा जायेगा और जब अहम आजायेगा तो की गयी सेवा का सत्यानाश हो गया।
राहु का काम सभी जगह पर वह बुरे काम कर सकता है जीवन को आग लगा सकता है तबाह कर सकता है कनफ़्यूजन मे डाल कर आराम से परलोक की सैर करवा सकता है लेकिन कन्या राशि मे राहु के आने के बाद वह एक तरह का जाल को काटने वाला चूहा बन जाता है और वह चूहा तभी काम करता है जब कन्या राशि वाला व्यक्ति यह समझने लगता है कि अब तो डूबने का समय आ गया है लेकिन राहु कही न कही से कोई ऐसा बन्दोबस्त करता है कि नाक से ऊपर पानी आते ही वह बचा लेता है इसी तरह से जब कोई किसी के फ़ैलाये जाल मे फ़ंस जाता है तो यह राहु चूहा बनकर अन्दर अन्दर ही जाल के धागो को काटता रहता है जैसे ही जातक को लगता है कि अब फ़ंस गये है और मरना ही है तो राहु जाल को ऊंचा कर देता है और व्यक्ति निकल कर सोचता है कि आखिर मे यह जाल कटा कैसे कटा।

अलग अलग राशियों मे कन्या राशि का प्रभाव

मेष राशि के लिये कन्या राशि छठे भाव की राशि है और जातक के लिये कर्जा दुश्मनी बीमारी के लिये यह राशि मानी जाती है अगर मेष राशि वाले के लिये मंगल इस राशि मे है तो जातक किसी भी प्रकार के कानूनी काम या किसी प्रकार के प्रतिद्वन्दी वाले काम आसानी से निपटाना जानता है उसकी भाषा और व्यवहार बहुत कडक होता है उसे जो करना है वह करते ही जाना होता है और अगर कोई ग्रह ग्यारहवे भाव मे कुम्भ राशि मे बैठ गया है तो जातक का जीवन अलबेला हो जाता है कारण जो भी कारण लाभ के होते है वह जातक की कटु रूप से की जाने वाली कमाई से होते है कानून भी जातक के कब्जे मे होता है और सबसे पहले जातक कानून को कन्ट्रोल करने के बाद ही कोई काम करता अगर जातक किसी प्रकार से राजनीति वाले काम मे चला जाता है तो खुद रक्षा सेवा वाले उसकी सहायता करते है चाहे वह काम अनीति का ही कर रहा हो लेकिन वह काम उसके लिये कानून की तरह से मान्य हो जाता है। इसी प्रकार से जातक के जीवन मे रोजाना के कामो के अन्दर बहुत ही कन्ट्रोल की पावर होती है वह अपने कामो को एक फ़ौजी शासन की तरह से करता है वह अगर किसी समुदाय या समाज का मुखिया बन जाता है तो वह अपने समाज और समुदाय को अपने जीते जी डूबने नही देता है कोई भी जातक की बराबरी नही कर सकता है अक्सर कर्जा और दुश्मनी वाले मामले मे जातक का कोई मुकाबला नही कर पाता है। इसी तरह से जातक को बाहर वाले लोगो से प्रेम भी होता है वह बडे संस्थान और रक्षा से रक्षित मकान या बडे भवन का स्वामी होता है। वृष के पंचम मे कन्या राशि आती है जातक का काम जल्दी से धन कमाने का होता है लेकिन इस राशि के प्रभाव से जीवन साथी के साथ सम्बन्धो मे तनाव का होना माना जाता है जीवन साथी आजीवन इस राशि वाले के लिये अपने को लगाये रखता है लेकिन जातक अपने जीवन साथी के कुछ कामो से सन्तुष्ट नही हो पाता है जैसे आपस के शरीर सम्बन्धो के मामले मे जातक को यही लगता रहता है कि उसके साथ धोखा किया जा रहा है या उसके जीवन साथी के सम्बन्ध किसी अन्य व्यक्ति से है आदि बाते देखी जाती है कन्या राशि वृष राशि वाले के लिये जल्दी से कर्जा करने आपस की दुश्मनी करने पुत्र की शादी के बाद पुत्र वधू से और पुत्र वधू के परिवार से बिगाड कर चलना आदि बाते देखी जाती है इस राशि के पंचम मे कन्या राशि आने के कारण जातक अपनी सन्तान के प्रति अधिक समर्पित रहता है भोजन बनाने मे और सन्तान को पढाई आदि के कम और करके सीखने के कामो का अधिक प्रयास करना आदि भी माना जाता है। मिथुन राशि के चौथे भाव मे कन्या राशि आने से जातक को अधिकतर किराये आदि से या तो रहना पडता है या वह किराया आदि के साधन से ही धन कमाने के कारणो को देखती है जहां भी इस राशि वाले का निवास होता है कन्या राशि के चौथे भाव मे होने से जातक आसपास के लोगो से कर्जा करना दुश्मनी के कारण पैदा करना बोलचाल मे अभद्र भाषा का प्रयोग करना आदि बाते देखी जाती है जातक के कन्या राशि चौथे भाव मे होने से ही जातक के कन्या सन्तति की अधिकता देखी जा सकती है इसके अलावा कोई ऐसा भी समय आता है जब कन्या सन्तान ही जीवन के आखिरी मे सहायक होती है कर्जा करने मे और लडाई झगडे को करने मे आपस के लोगो से ही इस राशि का प्रभाव देखा जाता है बात की बात मे बाल की खाल निकालना और नाचने कूदने मनोरंजन आदि के कामो मे मन लगना भी माना जाता है आसपास के लोगो से पहिचान बनाने के लिये इस राशि वाले कन्या राशि के चौथे भाव मे होने से यात्रा वाले कामो मे घरेलू कामो मे अपनी सेवा आदि देने से भी लोग इस राशि वालो से राजी रहते है। कर्क राशि वालो के लिये यह राशि तीसरे भाव मे होती है मानसिक रूप से अपने को हमेशा किसी न किसी बात से दिक्कत मे होना और नकारात्मक प्रदर्शन करना भी इसी राशि के तीसरे भाव मे होने से माना जाता है कन्या राशि के तीसरे भाव मे होने से कर्क राशि वालो का स्वभाव खोजी होता है और यह उसी जगह पर काम करने के लिये अपनी सेवाओ को देते है जहां धन को जमा किया जाता हो या धन के बदले मे ब्याज आदि का काम किया जाता हो बीमा और इसी प्रकार के काम होते है या किसी प्रकार की सम्पत्ति आदि के बाद ब्याज आदि से रुपया आदि दिया जाता है कर्क राशि के कन्या राशि तीसरे भाव मे होने से सन्तान के रूप मे कन्या संतान की अधिकता देखी जाती है या इस राशि की कन्या सन्तान किसी न किसी बात से दुखी देखी जा सकती है लेकिन यह दुख वाला समय इस राशि वालो के लिये उम्र की तीसरी सीढी यानी पचास साल तक ही मानी जाती है उसके बाद इस राशि वाले कन्या राशि की मदद से मजे मे रहते है जैसे ब्याज आदि के लेने वाले ब्याज नही ले पाते है और किराया आदि का काम करने वाले मजे से किराया आदि से अपने जीवन को चलाते देखे गये है। सिंह राशि वालो के दूसरे भाव मे कन्या राशि आती है इसलिये जन्म लेने के बाद से आजीवन इस राशि वालो को दुश्मनी बीमारी और धन आदि की दिक्कत को देखा जा सकता है इस राशि वाले अक्सर अपनी जीवनी सेवा वाले कामो से ही शुरु करते है और राजनीति आदि मे अपने वर्चस्व को बढाते है साथ ही इनके लाभ मे कमन्यूकेशन की राशि होने से बुध कन्या और मिथुन दोनो का ही मालिक है तो केवल बातो से धन को कमाना और लोगो की बातो से ही सहायता आदि करना माना जाता है इस राशि वाले कन्या राशि के दूसरे भाव मे होने के कारण सेवा से भी नगद धन के लिये कमाने के लिये माने जाते है लेकिन नकद धन उन्ही क्षेत्रो से कमाया जाता है जहां बडे संस्थान या कानूनी विदेशी दायरे आगे रहते है और इन्ही कारणो से अक्सर इनका धन विदेशो मे अधिक फ़ंसता भी है।

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