दो शब्द के नाम

राशियां अपना काम करती है चाहे प्रत्यक्ष मे करती हो या अप्रत्यक्ष में। एक शब्द का नाम अधिकतर अक्षरों की रूप रेखा पर अपना असर राशि के अनुसार प्रकट करता है जबकि दो शब्द का नाम भी अपनी अक्षरों की संख्या से दोहरे जीवन को जीने के लिये अपना कार्य करता है। भारत मे अधिकतर हिन्दू नाम ईश्वर के नाम से जुडे है। इन नामो मे जीवन कैसे चलता है एक प्रकार का विश्लेषण जो आजतक की ज्योतिषी जिन्दगी में मैने महसूस किया है उसका विस्तार से वर्णन इस प्रकार से है।
एक शब्द के नाम मे अक्षरों की रूप रेखा उन पर लगी मात्रायें और उनकी शक्ति के अनुसार देखा जाता है। राम हिन्दू देवता का नाम है और इस नाम के लिये कई प्रकार के उदाहरण जगत मे मिलते है। अक्षर र तुला राशि का है इसके अन्दर बडे आ की मात्रा का बल लगा हुआ है इसके बाद अक्षर म का आना सिंह राशि से माना जाता है। तुला राशि शुक्र की राशि है और इस राशि का मूल्य दुख या सुख मे बराबर की मान्यता से जोडा जाता है। पूरी रामायण पढने के बाद भी इस शब्द की कीमत कहीं भी कम नही होती है,सभी जगह बेलेन्स करने का काम ही इस नाम मे है। पैदा होने के समय मे भाइयों के प्रति शादी के समय में धनुष जग्य के प्रति बाद मे पत्नी सीता के प्रति फ़िर माता के आपसी बेलेन्स मे मतभेद के प्रति आगे चल कर वनवास के प्रति फ़िर बेलेन्स की कमी होने पर रावण जो राक्षसी रूप की सीमा था से युद्ध के प्रति बाद मे राज्य की प्राप्ति और सीता के त्याग के बाद पुत्रो की प्राप्ति वह भी दूर रहने और अन्त समय मे भाइयों सहित अपने धाम मे प्रवेश के लिये देखा जा सकता है। अक्षर र का मूल्य पुरुष के रूप मे है जो सन्यासी के रूप मे है लेकिन आ की मात्रा आजाने से पृथ्वी तत्व की महत्ता मिल जाती है,आ की मात्रा जो धरातल पर नाम के लिये मानी जाती है के लिये ही अवमूल्य है। ई की मात्रा धरती के नीचे और औ की मात्रा आसमानी शक्ति के रूप मे जोड कर देखी जाती है। र अक्षर पालक भी है जो पालना मे शरीर के रूप मे मानव के शरीर की पालना करता है। अगर आ को मनुष्य शक्ति के रूप मे देखा जाये तो वह रा मे भली भांति दिखाई देती है। अक्षर म सिंह राशि का है और इस राशि का भेद सभी जानते है जहां भी है यह अक्षर शुरु होता है राज्य और शेर की उपाधि अपने आप पनपने लगती है। सिंह राशि वाला व्यक्ति अपनी जगह अपने आप बना लेता है उसे किसी से पूंछने की जरूरत नही पडती है। युद्ध के कौशल मे वही जीतता है जिसे मानवीय शक्ति को बेलेन्स करने के बाद विभाजित करना आता है,वह अपनी सेना मे भी बेलेन्स कर ले और शत्रु की सेना का बेलेन्स तोडने की भी कला जानता हो। भगवान राम ने अपनी सेना मे वानर जैसे मनुष्य रूप जीव को अधिक बलशाली होने के कारण जोडना सीखा था तो शत्रु के भाई विभीषण को शत्रु के यहां से हटाकर अपने मे मिलाने का गुण भी उनके अन्दर था। म और वण के अन्दर जो भेद था उसके लिये अक्षर व केवल धन और सम्पदा के रूप मे देखा जाता है वह प्रत्यक्ष मे भौतिक कारणो को अपनी सीमा मे देखना चाहता है उसे अप्रत्यक्ष मे क्या होता है उसे समझना नही आता है उसी प्रकार से अक्षण ण का रूप भी केवल मारक के रूप मे देखा जाता है वह आसुरी शक्तियों और शमशानी कारणो के अलावा कुछ नही जानता है तुला और वृष राशि जिसका मालिक शुक्र है वह शुक्र केवल भौतिकता के रूप मे तो सामने आ सकता है लेकिन उसे आध्यात्मिक रूप मे अगर सामने देखना हो तो वह उन्ही शक्तियों की तरफ़ अधिक जायेगा जहां मारक शक्तिया काम करती है जैसे शमशानी साधना यही अन्तर राम और रावण के अन्दर था जो आगे चलकर आध्यात्मिक शक्ति से भौतिक शक्ति को निपटाने के लिये समझी जा सकती है। इसी प्रकार से भगवान राम के दूसरे नाम के लिये देखे तो रामचन्द्र का नाम भी देखना जरूरी है एक तुला राशि ऊपर दूसरी मीन राशि र अगर मनुष्य है तो उसे मीन राशि के लिये दुश्मनी से अपने हर काम को करना ही है दुश्मनी भी उस प्रकार से जो कोई एक व्यत्कि से विशेष मानयता नही रखती हो एक बडे समुदाय से संस्थान के मालिक से दुश्मनी करना इस प्रकार से माना जाता है मीन राशि कोई एक का स्थान नही है वह बहुत बडे संस्थान के प्रति आस्था को रखता है आदि बाते भी देखी जा सकती है।

नाम और धर्म

जातक के नाम के बाद धर्म यानी उसके पीछे के समुदाय का कथन आना जरूरी हो जाता है। लोग जिस धर्म या समाज मे पैदा होते है उसी के अनुसार अपने नाम को लिखना शुरु कर देते है हिन्दू अपने नाम को देवी देवता के नाम से लिखता है तो मुसलमान अपने नाम को अपने खुदा के नाम से जोड कर लिखता है ईशाई समुदाय मानवीय भावनाओ को अधिक बल देता है और उसी के अनुसार अपना नाम लिखता है। जो धर्म का होता है उसी के अनुसार अपना नाम रखना शुरु कर देता है,कई बार ऐसा भी होता है कि लोग अपने धर्म को परिवर्तित करने के बाद मिक्चर नाम भी बना लेते है आदि बाते देखी जाती है। इसमे पहला नाम भगवान का होता है दूसरा समुदाय से जोडा जाता है.

नाम और अर्थ

कई बार लोग अपने नाम को अपने व्यवसाय के साथ जोड कर लिखते है जैसे मुल्लू पंसारी हरीराम हलवाई आदि कई बार ऐसा भी देखा गया है कि लोग अपने को सम्पत्ति की तुलना मे भी नाम का प्रयोग करना शुरु कर देते है कई लोग अपने नाम को पद से जोड कर भी लिखते है.

नाम और स्थान

लोग अपने नाम को स्थान के अनुसार भी लिखते है और जिस देश स्थान या प्रान्त के रहने वाले होते है वह अपने को उसी प्रान्त के अनुसार भी लिखते है यह बात सभी धर्मो मे देखी जाती है जैसे रामसिंह देहलवी दिल्ली का रहने वाला है,रफ़त खान लखनवी लखनऊ के रहने वाले है आदि बाते देखी जा सकती है.

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