जन्म के समय का योग और स्वभाव

आप जन्म के वार तिथि करण आदि के बारे मे जान चुके है अब आपको जन्म के योग के बारे मे विस्तार से बताना चाहूँगा,कहा जाता है कि मन्दिर मे भोग की समझ अस्प्ताल मे रोग की समझ और ज्योतिष मे योग की समझ जिसे होती है वही मन्दिर फ़लीभूत हो जाता है,वही अस्प्ताल प्राणो को बचाने वाला होता है और वही ज्योतिष काम की मानी जाती है,मन्दिर के भोग को पुजारी समझता है असपताल के रोग को डाक्टर समझता है और ज्योतिष के योग को ज्योतिष का ज्ञान रखने वाला ही समझता है। कुल योग 27 सत्ताइस होते है,उनकी अलग अलग परिभाषा है। सूर्य और चन्द्रमा की गति मे जब 13-20 अंश का अन्तर आता है वह एक योग की सीमा मे बांधा जाता है,सूर्य और चन्द्रमा के अन्तर को जानने के लिये भी योग की सहायता ली जाती है।

योग योग का स्वामी योग का फ़लादेश
विषकुम्भ राहु जातक देखने मे बहुत खूबशूरत होता है लेकिन मन के अन्दर चालाकी और छलकपट का भरा होना पाया जाता है,अक्सर इस योग मे जन्म लेने वाले जातक डाक्टर सर्जन दवाई बनाने वाले लोगो की पीडा को हरण करने के लिये अपने प्रकार से सहायता देने वाले होते है। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक अगर किसी के प्रति सहायता करता है तो जातक के प्रति जिसकी सहायता की गयी है भूल नही पाता है और क्यों ही नही जातक सहायता करने वाले व्यक्ति के प्रति छल कपट या धोखा देने वाले काम किये हों,फ़िर भी जातक के प्रति लोग समर्पित भावना से ही काम करने के लिये अपनी गुहार लगाते है। जातक के पास जो भी जमा पूंजी होती है वह जातक के आगे की सन्तान के लिये दिक्कत वाला काम ही करती है जातक की सन्तान अधिक पूंजी या ग्यान की वजह से साथ ही अधिक दिमाग का प्रयोग नही कर पाने की बजह से परेशान होती रहती है। अक्सर जातक को फ़ोडा फ़ुंसी खून की बीमारी शुगर आदि की बीमारी उम्र की आखिरी मे मिलती है
प्रीति चन्द्रमा जातक के अन्दर दया भाव अधिक होता है और जातक को बिना सोचे समझे लोगो से प्रेम करने का मानस बना रहता है जातक जिस किसी से सलाह लेता है अक्सर ठगा ही जाता है,जातक का मन आहत होता है लोगो के लिये वह दया के प्रति भावना रखता है लेकिन स्वार्थी लोग उसकी दया का अनुचित फ़ायदा उठाते रहते है रास्ते चलते लोगो की आफ़त को गले बांधना भी एक आदत होती है और कभी कभी इस प्रकार के लोग बहुत अधिक चिन्ता मे जाने के कारण सिर दर्द के मरीज बन जाते है शरीर कमजोर हो जाता है पुरुष है तो स्त्रियों के द्वारा और स्त्री है तो पुरुषो के द्वारा भावनात्मक रूप से प्रताणित किया जाता है जब भी राहु का प्रभाव जीवन मे आता है इस प्रकार के जातक अपने को अपने ही कार्यों से इतना बांध लेते है कि जब बन्धन नही खुल पाते है तो खुद को समाप्त करने की भी ठान लेते है
आयुष्मान गुरु जातक माता पिता के द्वारा सन्तो और महापुरुषो के आशीर्वाद से पैदा होना माना जाता है जातक के जन्म के पहले जातक के माता पिता के द्वारा बहुत ही धार्मिक काम और पूजा पाठ तथा अपने धर्म के अनुसार महान कृत्य किये गये होते है।जातक सम्पूर्ण जीवन को जीने वाला होता है कभी कभी के अलावा उसे कोई कष्ट नही होता है जीवन साथी की तरफ़ से कष्ट मिलने की बात मिलती है कोई भी चाहे जातक का भला नही चाहे फ़िर भी जातक अपनी मौज मे मस्त रहता है।जातक किसी को भूल से भी आशीर्वाद देता है तो वह आशीर्वाद सफ़ल हो जाता है किसी के प्रति दुर्भावना से सोची गयी बात कभी भी पूरी नही होती है
सौभाग्य बुध जातक जन्म से ही अपने माता पिता तथा परिवार के लिये अपने अनुसार भाग्य वर्धक फ़ल देने वाला होता है जातक के अन्य स्थान पर भी जाने के बाद जहां वह रात भर भी विश्राम कर लेता है वहां के लोग सुखी होने लगते है। जातक की तेरह साल की उम्र के बाद जातक को भटकाव मिलता है लेकिन वह भटकाव जातक को पढने से अधिक करने से शिक्षा का देने वाला होता है उसकी रुचि बहिन बुआ के पास रहने की अधिक मिलती है वह अपने पिता से दूर ही रहता है साथ ही माता का साथ आजीवन रहता है लेकिन वह माता के प्रति आश्वस्त होने के कारण माता को समझ नही पाता है माता के मरने के बाद भी माता का आशीर्वाद उसके साथ हमेशा रहता है जातक के सन्तान की कमी मानी जाती है लेकिन अल्प सन्तान होने के कारण तथा सन्तान का हर बात मे अनुगामी होने के कारण जातक को जीवन पर्यन्त धन यश सम्मान और पारिवारिक जीवन मे दिक्कत नही आती है जातक को बुरे लोगो के द्वारा प्रताणित जरूर किया जाता है लेकिन कोई भी शत्रु की चाल जातक के लिये सफ़ल नही हो पाती है जातक का पतन तभी शुरु होता जब जातक के अन्दर बुरी भावनाये भर जाती है जातक तामसी कारणो मे चला जाता है या जीवन साथी के द्वारा अधिक लोभ के कारण जातक को बुरे रास्ते पर भेजने के लिये देखा जाता है। अगर जातक के मन मे व्यभिचार नही भरे तो जातक अपनी पूरी उम्र को जीता है और अपने कुटुम्ब के हाथ ही मोक्ष को प्राप्त होता है
शोभन शुक्र जातक की छवि अतुलनीय होती है जिसके सामने भी जाता है जातक के प्रति सभी को मोह होता है माता के प्रति भी जातक का अधिक लगाव रहता है उसे पत्नी या पति की तरफ़ से भी भौतिक सुख अधिक मिलते है लेकिन धन सम्पत्ति के अलावा मानसिक रूप से जातक को कष्ट मिलने की बात अधिक मिलती है जातक की सन्तान अधिक भोग मे जाने के कारण और तकनीकी रूप से मन को नही प्रयोग करने के कारण एक प्रकार से अयोग्य ही मानी जाती है जातक के प्रति सजावटी कामो के करने के लिये साथ ही लोगो के अन्दर अधिक प्रसिद्ध होने और विरोधी यौन सम्बन्धो के कारण जातक के शरीर मे कोई आन्तरिक रोग हमेशा के लिये लग जाता है जो जातक के जीवन को तबाह करने के लिये माना जाता है
अतिगंड केतु जातक के जन्म लेने के बाद ही सातवे दिन सातवे महिने सातवी साल तक पिता के लिये कष्ट का समय माना जाता है अगर पिता बच जाता है तो जातक के प्रति भी अस्पताली कारण बने रहते है जिस दिन से जातक पैदा होता है परिवार पर आफ़तो का पहाड ही किसी न किसी रूप मे टूटता रहता है जातक की बीमारी या पिता का कार्य आदि से मुक्त होना अथवा मामा परिवार के प्रति अक्समात ही आफ़ते आना भी माना जाता है,जातक को पेट के रोग अधिक होते है अक्समात ही आंतो की खराबी चमडी के रोग ऊंचे स्थान से नीचे गिरने के कारण लोगो के द्वारा पहले सामाजिक रूप से बढावा देने और बाद मे अक्समात ही अपमान करने से जातक को मान हानि की आशंका बनी रहती है अक्सर जातक का धन किसी न किसी प्रकार से चोर डकैत आदि लोगो से लूटा जाता है या उसके साथ बडी ठगी के लिये भी कई कारण बनते है जातक के सिर के आगे के बाद जवानी मे ही उडने लगते है और जातक के पैर के अंगूठे के साथ वाली गांठ अक्सर उभरने लगती है जिससे पैरो की बनावट बेहूदी हो जाती है,जातक का ध्यान बाहरी लोगो की तरफ़ अधिक होता है उसकी माता से कभी नही बनती है वह माता को प्रताणित करना जानता है पिता से केवल स्वार्थ तक ही साथ रहता है जातक के नाना नानी की मौत बहुत ही बुरी बीमारी मे होती है जातक के मामा आदि के अन्दर कोई न कोई अपंगता जरूर मिलती है
सुकर्मा सूर्य जातक का लगाव राजनीति और सामाजिक कामो की तरफ़ अधिक होता है जातक घर बाहर देश राज्य आदि के बारे मे राजनीति करना जानता है अक्सर सरकारी सेवा मे जाना होता है तकनीकी कामो को जानने के कारण जातक का नाम और यश भी होता है अच्छा इंजीनियर या वास्तुविद भी होना माना जाता है जातक का चेहरा चौकोर होता है जातक धन आदि के बारे मे कमाने और खर्च करने मे माहिर होता है जातक को कभी भी धन की कमी महसूस नही होती है जब भी धन की कमी होती है ईश्वरीय कृपा जातक को धन और सुख को प्रदान करने वाली होती है लोग उसके द्वारा बताये गये साधनो से ही काम लेने वाले होते है कभी कभी जातक के सामने अजीब से प्रतिद्वंदी सामने आते है लेकिन जातक अपनी तकनीकी सूझ बूझ और कार्य की चतुरता से किसी भी दिक्कत का सामना आराम से कर लेता है जातक के हाथो की उंगलिया पतली और कलाकारी से पूर्ण होती है जातक को भूख अधिक लगती है साथ ही जातक विरोधी यौन सम्बन्धो की तरफ़ भी अधिक आकर्षित होता है जातक अपने जीवन साथी को किसी भी मामले मे सन्तुष्ट रखना जानता है
धृति शनि जातक के जन्म के बाद ही सर्दी आदि की बीमारियां परेशान करती रहती है नाक का बहना सांस मे आवाज आना शरीर का पतला होना सूखा जैसे रोगो से पीडित होना आदि भी माना जाता है जातक अपनी उम्र के दूसरे भाग मे कार्य के लिये परेशान होता है दूसरो की सेवा करने के बाद ही उसे जीविका का साधन मिल पाता है और बहुत मेहनत करने के बाद ही उसे जीविका से जीवन चलाने मे माना जाता है जातक का जीवन साथी बहुत तेज बोलने वाला और क्रोध करने वाला होता है जातक का परिवार मेहनत वाले कामो मे ही संलग्न रहता है जातक की माता को भी तरह तरह की बीमारिया होती है और जातक की माता की मृत्यु लम्बी बीमारी या गठिया जैसे रोगो से होनी मानी जाती है जातक की घूमने की बहुत इच्छा होती है लेकिन कभी कभी जातक के दिमाग मे एक दौरा सा पडता है और जातक सभी काम धन्धे छोड कर बैठ जाता है जातक को भी पेट की बीमारी और झूठ बोलने की आदत भी होती है जातक को नीच संगति मे बैठने का कारण होता है अक्सर नीचे लोगो की संगति के कारण जातक को तामसी चीजे खाने पीने का शौक भी होता है,जातक को काला रंग पसन्द होता है जातक के रहने वाले स्थान का निर्माण अधिकतर पिता के द्वारा ही करवाया जाता है नही होने पर जातक को किराये आदि के मकान मे ही संकुचित जगह मे रहने का ही फ़ल मिलता है
शूल राहु जातक का शरीर दुबला पतला होता है माथा चौडा और थोडी पतली होती है जातक शुरु से ही माता के लिये कष्ट का कारक होता है पिता के द्वारा पैदा होने के बाद तामसी कारणो मे जाने से तथा ननिहाल खानदान के द्वारा पिता और पिता परिवार के लिये बुरा सोचने के कारण अक्सर पारिवारिक क्लेश का कारण बना रहना होता है। जातक के परिवार वाले शुरु मे तो पास मे रहते है लेकिन माता की हठधर्मी के कारण पिता एक साथ जातक को दूर जाकर अभाव मे रहना पडता है। जातक के दादा और पिता मे आपसी सामजस्य पिता की आदतो से नही बैठ पाता है जातक को ऊंचे स्थान से कूदने पेडो पर चढने या ऊंचे स्थान पर जाने तथा रोमांच आदि के काम करने से शरीर हानि की आशंका भी रहती है जहां पर जातक रहता है उसके प्रति लोग आशंकित ही रहते है वह परिवार मे रहता है तो परिवार वाले और कार्य स्थान मे रहता है तो कार्य स्थान वाले लोग उससे डरते ही रहते है कब कैसे और क्या कर बैठे किसी को पता नही होता है।झूठी बात सोचने या कहने के पहले जातक को नाक या कान सहलाने की आदत से भी परखा जा सकता है।
वृद्धि बुध जातक के पैदा होने के बाद परिवार कुल सम्पदा और नाम धन आदि की बढोत्तरी होने लगती है पिता और परिवार दिन दूना रात चौगुना बढने लगता है,जातक का पालन बहिन या बुआ के द्वारा शुरु मे होता है और जातक घर की बहिन बुआ बेटी का दुलारा होता है,जातक के अन्दर शुरु से ही व्यापारिक और लोगो से सम्पर्क बनाने के गुण होते है जातक के अन्दर मीठा बोलने की आदत भी होती है और सेवा भावना भी होती है। जातक के पैदा होने के बाद पिता को राजयोग जैसी बात मिलती है माता को सुखी रहने के लिये भूमि भवन और सम्पत्ति की प्राप्ति होती रहती है माता का आकर्षण अधिकतर गहनो और धन को इकट्ठा करने के प्रति होता है साथ ही माता कंजूस प्रकृति की भी होती है जातक शिक्षा मे अपने को आगे बढाता जाता है और धन तथा बैंक आदि की शिक्षा मे निपुण होता है अक्सर जातक के पैदा होने के बाद जातक की कोई बुआ या बहिन अपने परिवार से विमुक्त हो जाती है,जातक का जीवन साथी कर्कश स्वभाव का होता है लेकिन उसके इस स्वभाव से परिवार मे सुरक्षा की सीमा बढ जाती है जातक के परिवार के साथ जातक के रहने के समय मे कोई अपघात नही होती है जातक अपनी बुद्धि से सभी आफ़तो को एक किनारे करता रहता है
ध्रुव सूर्य जातक पैदा होने के बाद साम दाम दण्ड भेद आदि की नीतियों वाली शिक्षा मे निपुण होता है वह अपने नाम के आगे धन को महत्ता नही देता है जातक के पिता के प्रति संदेह किया जाता है लेकिन माता को बचपन से ही अभावो मे जीने की आदत होती है और वह बुद्धि से बहुत चतुर होती है साथ ही धन की महत्ता माता के अन्दर भी नही होती है वह अपने परिवार को कम साधनो मे भी चलाने की हिम्मत रखती है माता को कपडो जेवरो और धन सम्पत्ति से कोई लगाव अधिक नही होता है वह संतोषी स्वभाव की होती है पिता के अन्दर अधिक चतुरता के कारण या तो दूसरी माता का होना होता है या पिता का लगाव जातक के प्रति कम ही होता है जातक अपने प्रयासो से आगे बढने वाला होता है जातक अपने शौर्य से अपने काम और नाम को उन्नति देने वाला होता है
व्याघात मंगल जातक का स्वभाव खरा होता है वह किसी भी बात को कटु रूप मे कहने वाला होता है उसके कई प्रकार के दुश्मन बन जाते है और जातक के प्रति मानसिक दुश्मनी पालने लगते है जातक का शुरु का जीवन अभावो मे ही बीतता है उसे कठिन परिस्थिति मे शुरु का जीवन निकालना होता है लेकिन जवानी मे उसे सुख मिलने शुरु हो जाते है वह अपने को इतना कठोर बना लेता है कि किसी भी हालत मे अपने को रख सकता है उसे सुख की चिन्ता नही रहती है जंगल पहाड दुर्गम स्थान खतरो से खेलने के लिये वह अपने को अभ्यस्त कर लेता है,अक्सर उसकी कमजोरी का फ़ायदा उठाकर उसके अपने ही लोग उसके साथ घात करते है और जीवन को समाप्त करने की कोशिश करते है लेकिन बहुत ही ग्रह स्थिति कमजोर होने पर ही उसके साथ घात हो सकती है अन्यथा उसके अन्दर चीते जैसी फ़ुर्ती होने के कारण वह किसी भी घात से बच जाता है जातक के अन्दर दया भाव की कमी होती है और वह हिंसक रूप से अधिक प्रसिद्ध होता है
हर्षण केतु जातक का काम संचार के साधनो मे अधिक होता है वह चुगली करने का कारक भी होता है मीडिया या इसी प्रकार के क्षेत्र मे उसे सफ़लता मिलती है रोजाना के कामो मे संचार टेलीफ़ोन या मीडिया आदि के कामो मे वह अपने को व्यस्त रखता है,धागे का काम भी जातक के लिये फ़ल दायी होता है माता के परिवार से प्रेम होता है नाना के संस्कार उसके अन्दर होते है वह आदेश का पालन करने वाला होता है लोगो की सहायता के काम करने की आदत होती है अपने को जनता के कामो मे अग्रणी रखता है और राजनीति मे जाने के बाद लोगो की सहायता भी संचार के साधनो से करता है कद छोटा होता है लेकिन बुद्धि मे बहुत तेज होता है खुद कोई बुरा काम नही करने के बाद दूसरो से प्रतिस्पर्धा मे प्रतिद्वंदी को पछाडने की आदत होती है,भीड के साथ रहना और एक साथ हमला करने की भी आदत होती है हथियार आदि चलाने की विशेष योग्यता होती है शुरु का जीवन किसी बडे आदमी की सहायता मे बीतता है जिससे लोगो मे उठने बैठने और बात करने का लहजा भी आजाता है धन के मामले मे अनिश्चितता रहती है कभी बहुत होता है और कभी बिलकुल नही होता है तंत्र मंत्र और इसी प्रकार के कामो मे बहुत लगाव होता है जादुई बाते और उन पर अमल करना भी देखा जाता है
बज्र मंगल जातक शरीर से बलवान होता है कुस्ती शरीर से किये जाने वाले काम सिक्योरिटी वाले काम लडाई झगडा मे शरीर को प्रयोग करने वाले काम रीकवरी आदि के काम करने तथा लोगो से शरीर बल से जूझने की कला होती है अक्सर इस योग मे पैदा होने वाले जातक अपने शरीर की आहुति लोगो के लिये देते है और सुरक्षा आदि के कारको मे अपनी जान गंवाते देखे जाते है,इस योग मे जन्म लेने वाले जातक अक्सर अपने से बहुत ही कम उम्र के लोगो के साथ जैसे पुरुष स्त्री के लिये और स्त्री पुरुष के लिये अपनी कामेक्षा को जाहिर करते देखे जाते है अप्राकृतिक रूप से मैथुन करना और मैथुन मे शरीर को प्रताणित करना भी देखा जाता है अक्सर इस योग मे पैदा होने वाले जातक दूषित विचारधारा के अन्दर फ़ंस जाते है साथ ही अपनी घरेलू मान मर्यादा को भूल कर दूसरे लोगो की संगति मे आकर बडे से बडे कुकर्म भी कर बैठते है
सिद्धि गणेश जातक के अन्दर जन्म से ही एक प्रकार की ईश्वरीय शक्तियों का निवास होना माना जाता है जातक वेद पुराण ग्यान बैराग्य की तरफ़ बढता जाता है अधिक भाषाओ की जानकारी जातक को हो जाती है वह किसी भी प्रकार की सभा आदि मे अपने वचनो से प्रसिद्ध होता है लेकिन धन की कमी अधिकतर खुद के लिये देखी जाती है लेकिन भोजन वस्त्र और रहने के स्थान की कमी नही होती है जातक की सन्तान आगे जाकर धन और लाभ के प्रति अग्रसर होती है अक्सर द्वि पति या द्वि पत्नी योग देखा जाता है,लेकिन सामजस्य बिठाने मे जातक को कोई कठिनाई नही होती है,लोगो के द्वारा पूज्य भी होता है और ऊंची शिक्षा को प्राप्त करने मे तथा बडे लोगो की संगति मे भी जाने से जातक को आशीतीत फ़ायदा होता देखा जाता है अक्सर इस योग मे पैदा होने वाले जातक सलाहकार की सेवा मे अधिक काम करते है और जीवन भर लोगो को सलाह देने की बात करते है,यही सलाह देने के काम से ही उन्हे आजीविका की प्राप्ति होती है
व्यतीपात यम जातक का स्वभाव सेना मे जाने पुलिस मे जाने या जासूसी क्षेत्र मे जाने का होता है वह रक्षा वाले कारको मे सबसे आगे देखा जाता है बुराइयों को समाप्त करने मे उसे हत्या जैसे काम करने से भी परहेज नही होता है कानूनी कामो मे उसे विशेष सफ़लता मिलती है राजनीति मे जाने और राजनीति मे फ़ैली कुरीतियों को समाप्त करने मे वह अपने शरीर का भी ख्याल नही रखता है जीव हिंसा केवल मारक जीवो के लिये ही देखी जाती है जातक कभी भी मांस मदिरा आदि का सेवन नही करता है और किसी प्रकार की संगति मे करने लगता है तो फ़ौरन उसके शरीर मे कोई बीमारी या आफ़त होनी शुरु हो जाती है पिता के स्वभाव से विपरीत स्वभाव होता है बिजली के काम करना शक्ति से पूर्ण काम करना आदि धन की आवक के मुख्य स्तोत्र होते है
वरीयान शुक्र इस योग मे पैदा होने वाला जातक अक्सर शिक्षा के क्षेत्र को चुनता है और किसी भी प्रकार की शिक्षा को देने और उसके द्वारा लोगो के जीवन को सुधारने का कारण उसके पास होता है भले ही वह गरीब परिवार मे पैदा हुआ हो लेकिन उसके पास शिक्षा के द्वारा लोगो को धनी बनाने की कला होती है वह कारणो को अपने लिये प्रयोग नही कर सकता है लेकिन दूसरो के लिये साधना का रूप बताना उसकी आदत मे होता है। रोजाना जी जिन्दगी बहुत ही समय से चलने वाली होती है समय से जगना समय से सोना और सभी शरीर परिवार और समाज के कामो को समय से करने की आद्त होती है रोजाना जी जिन्दगी से जातक की पहिचान की जाती है जातक न तो अधिक बोलता है और न ही अधिक हंसता है केवल मनोधारणा से जातक की पहिचान होती है वही बात करता है जो बात लोगो के लिये कल्याणकारी होती है।
शिव शंकर जी इस योग मे पैदा होने वाला जातक शुरु से मनमर्जी का अधिकारी होता है उसे शरीर की कोई चिन्ता नही होती है अघोरी बातो मे उसे अधिक देखा जाता है वह सभी प्रकार के भोजन करने नशे वाले कारक प्रयोग करने जहरीले जीव जन्तुओं की पालना करने खुद के अन्दर अपने को मस्त रखने तथा लोगो के लिये कल्याणकारी कारक पैदा करने के लिये माना जाता है। जातक को समय कब अच्छा है कब बुरा है का कोई पता नही होता है कपडो रहने के स्थान तथा पारिवारिक रूप जातक के लिये कोई मायना नही रखता है अक्सर इस योग मे पैदा होने वाले जातक जवानी के बाद या तो साधु संतो की श्रेणी मे आजाते है या अज्ञात जीवन जीना शुरु कर देते है।
सुवृद्धि लक्ष्मी जातक धनी परिवार मे जन्म लेता है और अपने समय मे धन की वृद्धि का कारण बनता है सन्तान से हमेशा दुखी रहता है माता पिता के अनुसार चलने मे जीवन साथी से अनबन रहती है,धन ही मुख्य सोच होती है रोजाना की जिन्दगी के अन्दर केवल वही कारण देखे जाते है जो धन से सम्बन्धित होते है।
साध्य सरस्वती इस योग मे पैदा होने वाला जातक ऊंची शिक्षाओं के प्रति समर्पित रहता है,कई प्रकार की डिग्री डिप्लोमा आदि लेकर बडे पद पर आसीन होता है उसे किसी प्रकार के धन आधि का लोभ नही होता है वह केवल जगत कल्याण वाले काम करने के लिये अपनी योग्यता को प्रस्तुत करता है कभी कभी झूठे लोगो के चक्कर मे अपमान सहना पडता है और इस अपमान के कारण अक्सर जातक के शरीर मे कई प्रकार की बीमारिया भी लग जाती है जातक जहां भी रहता है वहां के माहौल मे उसकी पहिचान मानी जाती है अक्सर इस योग मे पैदा होने वाले जातक अविवाहित ही रहते है अगर शादी किसी प्रकार से हो भी जाती है तो वैधय्व जैसे योग देखने पडते है या पति या पत्नी से आजीवन किसी न किसी बात पर अनबन का कारण ही बना रहता है
शुभ रिद्धि जातक का मन हमेशा अच्छे और न्याय के कार्यों मे लगता है उसके द्वारा किसी भी प्रकार के अनैतिक काम मे जाने का योग नही बनता है माता खानदान धनी होता है तथा नाना खानदान के द्वारा जातक को सहायता मिलती रहती पिता का जगत कल्याणकारी होने के कारण समय कम मिल पाता है और पिता की तरफ़ जातक को उपेक्षा ही मिलती है। रोजाना की जिन्दगी उसके सभी प्रकार के साधन होने के बावजूद भी वह लोगो के लिये अपने शरीर को कष्ट देने के लिये अपने समय को प्रयोग मे लेता है रसायन शास्त्र और गणित ज्योतिष आदि मे उसकी अच्छी जानकारी होती है
शुक्ल चन्द्रमा शुक्ल योग मे जन्मा व्यक्ति जीवन की ऊंचाइयो को सहज ही प्राप्त कर लेता है उसके जन्म के बाद पिता से और माता से आपसी मतभेद पैदा हो जाते है माता के द्वारा ही जातक का पालन पोषण किया जाता है माता के द्वारा कष्टमय जीवन जीने के कारण जातक की बहुत सी इच्छाये पूरी नही हो पाती है,शादी के बाद जातक अपने जीवन साथी के साथ जीवन की सभी अपूर्ण इच्छाओ की पूर्ति चाहता है अक्सर इसी कारण से जातक का जीवन साथी के परिवार से तनाव हो जाता है और यही तनाव आजीवन बना रहने से जातक की भी अपनी माता की तरह से हालत हो जाती है अगर जातक पुरुष जातक है तो जातक आजीवन संघर्षों से घिरा रहने के बावजूद भी अपनी इच्छाओ की पूर्ति नही कर पाता है,जातक के लिये बुरा समय जीवन के शुरुआत से ही शुरु होना माना जाता है लेकिन उम्र की अधेड अवस्था से जातक के लिये अच्छा समय शुरु हो जाता है.
ब्रहम ब्रह्मा इस योग मे पैदा होने वाला जातक सभी प्रकार की विद्याओ मे प्रवीण हो जाता है शुरु मे पिता के द्वारा पालन पोषण किया जाता है माता का कम साथ मिलता है बडे होने पर उसकी परवरिस उसके पुत्रो के द्वारा की जाती है पत्नी का या पति का साथ कम मिलता है कन्या सन्तान की अधिकता हो जाती है और जातक इन्ही कारणो से या तो बहुत ही भ्रमित रहता है या फ़िर किसी प्रकार से पूज्यनीय होकर जीवन को जीता है। शिक्षा का क्षेत्र लोगो के लिये उपदेश देने का क्षेत्र धर्म गुरु का क्षेत्र आदि क्षेत्रो मे जातक प्रसिद्धि लेता है
एन्द्र इन्द्र इस योग मे पैदा होने वाला जातक सभी सुख सुविधाओ से युक्त होता है और राजनीति आदि मे जाकर ऐश्वर्य का जीवन जीता है,सवारी रहन सहन आदि की सुविधा जातक को जन्म से ही मिल जाती है जनता की सेवा करने का अवसर भी खूब प्राप्त होता है अक्सर लोगो के लिये अपने कार्यों से गणमान्य व्यक्तियों मे गिना जाता है
वैधृति धूमावती इस योग मे पैदा होने वाला जातक अक्सर पिता से हीन होकर ही पैदा होता है इसका कारण या तो जातक का पिता स्वर्ग सिधार गया होता है या माता पिता से विलग होकर रहती है.अगर नही तो जातक जीवन मे जब भी शादी करता है वह अपने जीवन मे वैवाहिक सुख को प्राप्त नही कर पाता है। जातक को जीभ की बीमारिया होती है जातक असत्य वचनो के प्रति अधिक अग्रसर रहता है,जब भी कोई बाधा जीवन को परेशान करती है जातक घर द्वार छोड कर दूर चला जाता है या एकान्त वास करने लगता है,जातक के जीवन मे धन का हमेशा अभाव रहता है जल्दी से धन कमाने के साधनो की तरफ़ जाने से कर्जाई होना भी देखा जाता है कोई न कोई असाध्य बीमारी जीवन के अन्त मे लग जाती है
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