राहु का नशा

राहु एक छाया ग्रह है,जिसे चन्द्रमा का उत्तरी ध्रुव भी कहा जाता है,इस छाया ग्रह के कारण अन्य ग्रहों से आने वाली रश्मियां पृथ्वी पर नही आ पाती है,और जिस ग्रह की रश्मियां पृथ्वी पर नही आ पाती हैं,उनके अभाव में पृथ्वी पर तरह के उत्पात होने चालू हो जाते है,यह छाया ग्रह चिंता का कारक ग्रह कहा जाता है।

राहु के कुप्रभाव से बचने के लिये रत्न धारण करना

राहु के कुप्रभाव से कालान्तर तक बचने के लिये रत्नों को धारण किया जाता है,अलग अलग भावों के राहु के प्रभाव के लिये अलग अलग तरह के रंग के और प्रकृति के रत्न धारण करवाये जाते है,अधिकतर लोग गोमेद को राहु के लिये प्रयोग करवाते है,लेकिन गोमेद एक ही रंग और प्रकृति का हो,यह जरूरी नही होता है,जैसे धन के भाव को राहु खराब कर रहा है,और अक्समात कारण बनने के बाद धन समाप्त हो जाता है,तो खूनी लाल रंग का गोमेद ही काम करेगा,अगर उस जगह पीला या गोमूत्र के रंग का गोमेद पहिन लिया जाता है,तो वह धार्मिक कारणों को करने के लिये और सलाह लेने का मानस ही बनाता रहेगा,गोमेद की कीमत साधारण रूप में Rs.300/-INR सवा पांच रत्ती की होती है,लेकिन भावानुसार अलग अलग कलर की और प्रकृति के अनुसार कीमत कम और अधिक भी होती है,जैसे नीले रंग का गोमेद Rs.35000/-INR का भी होता है,और अधिकतर राहु के साथ दु:स्थानों में मंगल की युति के लिये पहिना जाता है।

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