सपना
सपना
जन्म दिनांक १९ जनवरी १९७९ समय सुबह ८-१५ सुन्दर बनी (जम्मू)
पिछले २२ नवम्बर २००७ से गुरु ने बुध से गोचर किया है,और इस गोचर से जातिका को नया ज्ञान प्राप्त करने की सहायता मिलती है,पारिवारिक माहौल में बच्चे स्वस्थ रहते है,किसी न किसी प्रकार की तीर्थ यात्रा का संयोग बनता है,किसी न किसी प्रकार से प्लात या जमीन खरीदने का समय शुरु होता है,यह समय पिछले ९ सितम्बर तक तो चला लेकिन उसके बाद किसी न किसी प्रकार से अन्धेरे में चला गया,और इसी प्रकार की बातें आगे आने वाले दिसम्बर २००८ के आखिरी सप्ताह तक चलनी है।
जातिका को भूमि से अचानक लाभ मिलता है,किसी प्रकार की खरीद बेच करने से पति लाभ लेता है,पति का ध्यान घर के कामों को भूलकर दूसरे और बाहर वाले कामों की तरफ़ मन जाता है,और पति को अपने व्यवहार के कारण परिवार और समाज बालों से परेशानी भी मिलती है,कार्य में परिवर्तन का पूरा पूरा योग है,दिमागी अशान्ति के लिये परेशानी दिमाग में पैदा होती है,उस परेशानी के कारण पति का झुकाव किसी न किसी प्रकार की दवाई या जहरीली वस्तु खाने का योग भी पैदा होता है।
पति के दिमाग मे अधिक चिन्तायें होने के कारण कार्य करने की क्षमता समाप्त होती है,व्यवसाय करने वाले लोगों से वैचारिक मतभेद पैदा होते है,और उन वैचारिक मतभेदों के कारण चलने वाले व्यवसाय को बदलने का दिमाग बनता है,साथ काम को बदलने में स्टेशनरी या गैस वाले काम,कम्प्यूटर या मीडिया वाले काम,सीडी या इलेक्ट्रोनिक सामान बेचने वाले काम,टेलीफ़ोन और मोबाइल को रीचार्ज करने वाले काम सामने आते है लेकिन इन सब कामों की अपेक्षा अगर जमीनों को बेचने वाले काम,प्लाटों के खरीद बेच का काम,बेकार की जमीनों को खरीदने और फ़िर उसमे प्लाट आदि काटकर बेचने के काम किये जाते है,या फ़िर किसी प्रकार की खाद या जमीनी शक्ति को बढाने वाले कारकों के प्रति काम किया जाता है तो फ़ायदा और अच्छा मिलता है।
इसके बाद गुरु का गोचर सूर्य और मंगल के साथ होना शुरु होगा,जातिका के अन्दर अचानक धर्म कर्म करने की तरफ़ मानसिक लगाव शुरु होगा,किसी न किसी प्रकार से यश मिलने का कारण बनेगा,अगर पिता या घर वालों ने सहयोग दे दिया तो शिक्षा या व्यवसाय वाले कारणों मे फ़ायदा भी होता मिलता है। अधिकतर विद्वान लोगों द्वारा पति की सहायता भी की जाती है। इसके साथ जातिका के अन्दर स्वाभिमान की मात्रा का बढना मिलता है,अधिक गुस्सा और सोचने के कारण शरीर में एक नई बीमारी जिससे ब्लडप्रेसर का कारण भी पैदा होता है,पिता और भाई को चिन्ता भी दी जाती है,लेकिन उस चिन्ता के चलते भी भाई सभी समस्याओं से लडकर अपनी उन्नति भी करता है,जातिका के अन्दर गुस्से की मात्रा भी बढती है। जातिका के गुप्त शत्रु पैदा हो जाते है,यही हाल पति के साथ भी होता है,माता के अन्दर और सास के अन्दर धार्मिकता का प्रभाव बढ जाता है,दुर्गा देवी की तरफ़ लगाब बढ जाता है,सर्दी जुकाम की बीमारी पीछा भी नही छोडती है,घर से बाहर रहने का योग बन जाता है,और स्थान परिवर्तन का समय पति के साथ खुद का भी हो जाता है,अधिक यात्रायें होने लगती है,और घर या परिवार ससुराल की चिन्ता भी दिमाग मे रहने लगती है।यह सब आगे आने वाले नवम्बर २००९ तक चलता है।
अभी आगे आने वाले नवम्बर २००९ तक पिता के स्वास्थ्य पर जातिका की चिन्ता के कारण अधिक प्रभाव पडेगा,और अधिक सोचने के कारण पिता का स्वास्थ खराब ही रहेगा,अचानक आंखों की परेशानी और ह्रदय वाली बीमारिया पिता को जातिका की बातों के प्रति सोचने के कारण मिल सकती है,पिता को किसी न किसी प्रकार से दिल का दौरा भी पड सकता है,पिता की चिन्ता के कारण जातिका के काम भी असावधानी से होने लगते है,और जातिका जो भी काम करती है उसके अन्दर कोई न कोई कमी रह जाने के कारण घर या परिवार के लोग उससे बातें बनाने लगते है,जातिका का स्वास्थ्य अधिक चिन्ता के कारण गिरता जाता है,कही न कहीं से कोई न कोई समाचार जो भी मिलते है वे सभी अशुभ ही मिलते है,यही हाल माता का भी होता है,माता को जातिका के ग्रह योग के कारण काफ़ी कष्ट झेलना पडता है,मानसिक परेशानी भी होती है,और माता के जीवन को खतरा भी माना जा सकता है,इन्ही सब बातों के चलते भाई और पति दोनो को परेशानी होती है,पति के बडे भाई के जीवन को खतरा होता है,जातिका के अन्दर खून वाली बीमारी और रक्त चाप की बीमारी आती है,किसी न किसी प्रकार से सवारी गाडी से जातिका या भाई या पति को चोट भी लगती है,और रीढ की हड्डी की चोट के कारण लम्बे समय तक चारपाई पर भी रहना पड सकता है।
जातिका के जीवन के लिये आगे आने वाले दिसम्बर २००८ के आखिरी तक खतरा है,कारण गुरु के साथ राहु सप्तम से गोचर कर रहा है,जातिका का राहु आठवें मृत्यु भाव में विराजमान है,जातिका को वात रोग की शिकायत मिलती है,इसकी प्रथम पहिचान यह मिलती है,जीवन के प्रति निराशा का भाव दिमाग में पैदा होता है,और जातिका अपने जीवन को समाप्त करने के प्रति अग्रसर हो जाती है,अधिकतर मानसिक तनाव के कारण और घर परिवार में पति के द्वारा किये गये कार्यों से तथा पीछे के कार्यों को करने के बाद आने वाले धन का सही पता नही चलने के कारण जातिका को डर रहता है कि किसी प्रकार से हिसाब किताब का सही कारण नही मिल पाया तो उसके साथ क्या होगा या बदनामी होगी या फ़िर माता पिता के ऊपर किसी प्रकार का आक्षेप लगेगा,यह बात पति और जातिका दोनो के साथ चलती है,जातिका को और जातिका के पति को आगे आने वाले नवम्बर २००९ तक किसी प्रकार से नकारात्मक भाव दिमाग में नही लाने चाहिये,तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ नित्य करना चाहिये।
जातिका से पिछले जुलाई २००८ से पति के साथ आपसी अनबन चल रही है,और यह अनबन किसी प्रकार से प्रकट भी नही हो रही है,गृहस्थी में आने वाले पैसे की कमी भी अनुभव हो रही है,जातिका को स्वप्न में किसी न किसी प्रकार की बेकार की महिलायें दिखाई दे रही होंगी,जातिका मन में डर भी लग रहा होगा,जातिका अपने आपको अकेला बैठने का मन भी बना रही होगी,तथा पूंछने पर भी कोई बात न करके केवल या तो रोती होगी या फ़िर अनमनी बैठी रहती होगी,जातिका के रहने वाले स्थान के दक्षिण पश्चिम दिशा से एक विधवा स्त्री का घर में आना जाना बढ गया होगा,जातिका के परिवार में जातिका के पति की मौसेरी बहिने या अन्य प्रकार की स्त्रियों का आना जाना भी बढा होगा,जातिका के पति का रुझान अपने घर के अलावा जल्दी से धन कमाने के साधनों की तरफ़ भी बढने लगा होगा,और जातिका के पति के द्वारा जल्दी से धन कमाने के चक्कर में किसी प्रकार के सट्टे या अन्य कारण की तरफ़ भी मन लगना माना जा सकता है,यह सब कारण ही जातिका के परेशानी के कारण है,जातिका से जिस स्त्री का लगातार उपरोक्त तारीख से मिलना जुलना या प्रेम चल रहा है,वह ही जातिका के मानसिक तनाव को देने में अपनी मुख्य भूमिका अप्रत्यक्ष रूप से कर रही होगी।
नवम्बर २००९ के बाद जातिका ने अगर अपने को संभाल लिया,और पति की सीमाओं को अपने अन्दर समेट कर रखा,तथा उसे अकेला नही छोडा तो जातिका का पति अपने अगले व्यवसाय में एक सवारी गाडी का इन्तजाम करेगा,जातिका को चमडी वाली बीमारी देकर यह राहु चला जायेगा,जातिका का जो भी घर आदि बनता है,और जातिका के पति के परिवार से दक्षिण पश्चिम दिशा की पडी हुयी खाली जमीन का प्रयोग नही किया जाता है तो जातिका के पति और उसके परिवार पर कोई असर नही होगा,उसके साथ जातिका के पति के द्वारा अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य के द्वारा किसी प्रकार का घर का निर्माण करवाया जाता है,तो घर में लगाये गये धन के दस गुने अधिक पैसे किसी अन्य प्रकार के मद में खर्च किये जायेंगे,जो कि बेकार का ही मद माना जा सकता है।
रामेन्द्र सिंह भदौरिया
जयपुर
दिनांक २७ सितम्बर २००८,समय रात-११ बजे.
श्री सुभाष गुप्ता
फ़र्रुखाबाद
दिनांक २७ सितम्बर २००८
प्रश्न
मकान के कागज मिल जायेंगे?
उत्तर
आपके मकान के कागजों के प्रति बने हुये मकान के प्रति कुछ जमीनी नाप जोख का चक्कर है,और जमीनी नाप जोख करवाने के बाद आपके कागज किसी प्रकार से काम किये जाने वाले साधन के प्रति गिरवी या धन के प्रति बन्धक है,उनको लेने के लिये अभी आपको आगे आने वाले मार्च के महिने तक इन्तजार करना पडेगा,रहने वाले मकान के बाहरी दरवाजे के दोनो तरफ़ लाल सिन्दूर और घी मिलाकर सातिया बना देवें और रोजाना शाम को "ऊँ स्थान देवताभ्यो नम:,ऊँ ग्रामदेवताभ्यो नम:,ऊँ वास्तु देवताभ्यो नम:" मंत्र को नौ बार बोलकर अगरबत्ती लगावें,सुबह जगकर दरवाजे पर झाडू लगाकर पानी को छिडकें,और उन सातियों के नीचे एक एक चुटकी गेंहूं का आटा डाला करें। दरवाजे पर आने वाले किसी भी भिखारी या भूखी आत्मा को खाली वापस नही भेजें।
प्रश्न
गाडी का केस निपटने के लिये ?
उत्तर
गाडी की समस्या से निपटने के लिये किसी भी शनिवार को पांच या सात बांस की काले रंग की बांसुरी लें या फ़िर किसी पोले बांस को गांठ के नीचे से काटकर उन पोले बांसों में गुडिया शक्कर भरकर शमशान में शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय दबाना चालू कर दें,यह काम लगाता नौ सितम्बर २००९ तक करते रहें,केस खत्म हो जायेगा,किसी प्रकार के राजी नामे का प्रभाव लेने के लिये किसी प्रकार के नीची जाति के आदमी को बीच में न लें।
प्रश्न
घर में कोई परेशानी नही आये?
उत्तर
घर की परेशानी से बचने के लिये किसी भी मंगलवार को छत पर दोपहर के समय सवा गज या मीटर के बढिया लाल सुर्ख कपडे को काटकर एक झंडी का रूप दें,और किसी हरे रंग के बांस या किसी लम्बी लकडी पर उस झंडी को मजबूती से बांध कर छत पर लगा दें,रोजाना शाम को कडवे तेल का दीपक उस झंडे के नीचे जलावें,और नौ दिन या ग्यारह दिन यह काम करने के बाद उसे लगा रहने दें,अगर किसी प्रकार से आंधी या बरसात में झंडा गिर जावे तो उसे वापस से बांध दें,ध्यान रहे कि वह किसी प्रकार से कहीं अलग स्थान पर नही गिर पावे।
प्रश्न
कारोबार में वृद्धि हो और कोई परेशानी नही हो?
उत्तर
घर मे अन्दर किसी प्रकार की आपसी टेंसन न हो,और कभी भी किसी भी औरत की जीभ घर के अन्दर नही चले किसी बच्चे को परेशानी हो तो उसे हटाकर दूर किया जावे,खाना खाते समय तीन ग्रास एक गाय का एक कुत्ते का और एक कौये का निकाल कर अगर घर का मालिक या मालिकिन खाना खाते है तो घर के अन्दर परेशानी नही आ सकती है,इसके साथ घर के दरवाजे के ऊपर किसी कांच के गिलास में पानी भर कर रख दिया जावे,तथा वह पानी खत्म नही हो पावे,जब भी खत्म हो तो उसे फ़िर से भर दिया जावे,घर के अन्दर परेशानी आने से रोकने के लिये यह सब उपाय करने चाहिये।
प्रश्न
बच्चे पढ जावें?
घर के बच्चों की उन्नति और पढाई में अपना मन लगाने के लिये बच्चों को घर की वायव्य दिशा में बैठाना हितकर होता है,साथ बच्चों के पढने के समय उनका मुंह उत्तर दिशा में होना चाहिये,बच्चों को जल्दी से सोने दिया जाय और सुबह जल्दी से जगागर उन्हे नित्य क्रिया करने को कहा जावे,खाने में शाम को हमेशा हल्का खाना दिया जावे तथा स्कूल के अलावा छ: घंटे लगाता घर में पढने के लिये उनको समय दिया जावे,बच्चे आगे निकलते चले जायेंगे,शाम को अपने घर के पूजा वाले स्थान पर सभी बच्चों को इकट्ठा किया जावे और माता सरस्वती की आरती उनके द्वारा ही तिल के तेल से करवायी जावे,तो बच्चों की याददास्त बढती है,बच्चों के सोने के समय उनके पैर उत्तर दिशा की तरफ़ होने चाहिय,बच्चे को खाना खाते समय सभी टीवी और मनोरंजन के साधन बंद कर देने चाहिये।
प्रश्न
दीपावली अच्छी तरह से बीते?
उत्तर
दीपावली लक्षमी के साथ काली और सरस्वती का त्यौहार भी होता है,दीपावली पर किसी प्रकार आफ़त नही आये,इसके लिये घर के अन्दर प्रत्येक कमरे में नमक का पौंछा लगाना हितकर होता है,किसी प्रकार से तामसी भोजन का घर में बनना भी अहितकर होता है,किसी के यहां से आया हुआ प्रसाद या अन्य बायना वाला सामान भी घर के बच्चो और बडों को नही खाना चाहिये उसे किसी गाय या जानवर को खिलाना चाहिये,घर के कुत्ते को दरवाजे तक ही सीमित रखना चाहिये,गणेश और स्थानदेवता और अपने पूर्वजों के प्रति पूजा पाठ और ध्यान आदि में स्थान देना चाहिये,अगर हमेशा से किसी प्रकार का विघ्न पैदा होता हो तो आठ फ़ूल किसी भी प्रकार के शाम के समय पूजा में लाकर रखने चाहिये और उन्हे सुबह पूजा करने के पहले उठाकर किसी साफ़ जगह पर डाल देने चाहिये।
प्रश्न
उधारी वाले पैसे मिलने के लिये?
उत्तर
उधार दिया गया धन वापस करने के लिये किसी खुले हुये हनुमानजी का स्थान तलासना जरूरी है,और मूर्ति का मुंह खुला होना जरूरी है,मंगलवार से एक लड्डू को चार लौंग लगाकर जिसे पैसे दिये है,या जिसके पास पैसा है उसका नाम लेकर उसे हनुमानजी के मुंह में रखकर आना चाहिये,उसके बाद किसी भी रविवार को एक कागज में चांदी की चवन्नी या अठन्नी को तीन बार लपेट कर किसी चौराहे जहां पर कच्चा रास्ता हो,रात को दो बजे से पहले दबाकर दबे हुये स्थान पर नौ बार अपने बायें पैर से ठोकर देकर आना चाहिये,और अगर रविवार को उसी समय उस चौराहे पर जाकर उस अठन्नी या चवन्नी को उखाडकर जेब में रख लेना चाहिये तथा,उस कागज को वहीं खुला छोडकर वापस बिना पीछे देखे वापस आना चाहिये,उसके बाद जिसे पैसे दिये है उससे तकादा करने जब जायें तो उस पैसे को अपनी जेब में रख कर ले जावें।








