वृष राशि

वृष लगन के बारे मे ज्योतिषियों के विचार आपस मे बहुत मतभेद रखते है। इन मतभेदो का होना वास्तव मे ठीक भी लगता है। वृष लगन एक रूप से गुस्से से आग बबूला हुआ ऐसा सांड है जो अपने शत्रु का बीज नाश तक करने के लिये तैयार है और दूसरी तरफ़ यह शिवजी का वाहन नंदी बैल है जो अपनी मस्ती मे झूमता हुआ चलता है,लेकिन जल्दी से कहीं पहुंचने की उसे कोई चिन्ता नही है,कहा जाता है कि शिवजी के ससुर जिनका नाम दक्ष थावह एक बार शिवजी से खुश होकर उन्हे कुछ भेंट करना चाहते थे। अब भोलेनाथ को कौन सी वस्तु भेंट की जाये यह सोच पाना उनके बस की बात नही थी,सुन्दर वस्तुओं से शिवजी का कोई विशेष प्रेम भी नही था। और सोना जेवरात भी उनकी नजर मे कोई कीमत नही रखते थे। उनक एलिये गले मे पहने हुये जहरीले नाग ही उनका हार श्रंगार है और वे अपने ही नशे की मस्ती मे झूमते हुये खुश रहते है। बहुत सोच विचार के बाद उनके ससुर ने उनको भेंट के तौर पर एक बैल दिया। इसी बैल का नाम नन्दी था जो शिव का वाहन बना। इसका रूप ऐसा था जैसे सफ़ेद बर्फ़ का कोई सुन्दर बलवान बैल,और जिसके शरीर से शक्ति ही शक्ति फ़ूट रही हो। उसकी गर्दन बहुत मांसल थी और उसके शक्तिशाली सींगो का ऊपर का हिस्सा लाल रंग का था और वे सींग इतने कठोर सख्त जैसे हीरे के बने हुये हों। शिवजी एक महान योगी है और वह जीवन को हर रूप मे भोगना चाहते है इसीलिये यह शिवजी के लिये सबसे अच्छा वाहन था क्योंकि सांड मस्ती और कामुक ऊर्जा का सबसे अच्छा प्रतीक माना जाता है,यह कोई आश्चर्य की बात नही है कि वृष लगन वाले लोगों मे इस प्रकार का स्वभाव पाया जाता है। हमारे ज्योतिष के एक प्राचीन विद्यान श्री हिमाद्री ने अपने ज्योतिष ग्रंथ चतुर्वर्ग चिन्तामणि मे बारह राशियों के प्रतीकात्मक चिन्हों की चर्चा करते हुये लिखा ह कि वृष राशि का आकार ऐसा है जैसे एक सफ़ेद रंग का दूध जैसा आदमी हो किन्तु उसका चेहरा बैल का हो वह लाल कपडे पहने हुये है और उसके एक हाथ मे एक खाली बर्तन इस बात का प्रतीक है कि वृष लगन वाले व्यक्ति अपनी आर्थिक सफ़लता से कभी पूरी तरह संतुष्ट नही होते उनक एलिये धन केवल उनकी जरूरतों को पूरा करने का साधन ही नही है बल्कि धन उनके लिये जीवन का आधार है,उनकी नजर मे इस बात का महत्व अधिक है कि उनके पास क्या है और बहुत हद तक उनके व्यक्तित्व की गरिमा उनके पास होने वाले धन तथा अन्य कीमती चीजों से होती है,इस अर्थ मे शायद यह खाली बर्तन का प्रतीक ठीक है जिसे वे रिरंतर भरने की कोशिश मे रहते है लेकिन फ़िर भी उनको लगता है कि ये खाली का खाली ही है और वे इसे लगातार भरते ही रहना चाहते है। संभवत: यह भी हो सकता है कि वह खाली बर्तन कब का भर चुका हो और उसमे कुछ डालने की गुंजाइस भी न हो मगर वृष लगन वालों को किसी भी प्रकार से मानसिक संतुष्टि नही होती कुछ हद तक भूखी ही रह जाती है।

दूसरे जो उस व्यक्ति के हाथ मे माला का होना दर्शाया गया है वह माला उसके हाथ मे जरूर है,मकर उस माला के द्वारा वह किसी दूसरी दुनिया मे नही पहिंच पाता है और न ही वह इस माला के जाप कर सकता है,लेकिन वृष लगन के हजारो व्यक्तियों मे एक व्यक्ति जरूर इअसा होता है जो अपने अन्तिम समय मे इस माला का प्रयोग कर आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यहां महात्मा बुद्ध का जिक्र करना जरूरी समझता हूँ कहा जाता है बुद्ध वृष लगन मे पैदा हुये उनको इसी राशि मे ज्ञान प्राप्त हुआ और उसी रासि मे उन्होने शरीर का त्याग किया,इसलिये बहुत से उत्सव व पर्व वृष राशि मे ही मनाये जाते है,जब पूर्ण चन्द्रमा और सूर्य वृष राशि से गुजरते है यहां पर कहने का तात्पर्य यह है कि वृष लगन वाला व्यक्ति ज्ञान के शिखर पर पहुंच तो सकता है किन्तु उसके पहुंचने का रास्ता वही हो जो बुद्ध का था। बुद्ध की तरह जीवन के आरंभ से ही सब सुख आराम का भोगना आवश्यक होगा जैसे बुद्ध को बेशुमार धन सुन्दर वस्त्र जेवर भोजन सब कुछ एक शाहना ढंग से प्राप्त था। किन्तु उन्होने सब कुछ भोगने के बाद ही यह जाना कि इस संसार मे भोगों की प्राप्ति का कोई अर्थ नही। वृष लगन वाले व्यक्ति बुद्ध की तरह से अपने जीवन का लक्ष्य तय करते है। लेकिन यहां दिक्कत यह हो जाती है कि वह इस लक्ष्य मे ही इतना उलझ जाते है कि उनको धन की प्राप्ति भोग आदि के जंजाल से बाहर आना मुश्किल हो जाता है,इसीलिये वृष लगन के व्यक्तियों मे पकडी हुयी माला तो बन जाती है लेकिन वह जीवन उच्चतम ज्ञान तक जाने का साधन नही बनती। यह जरूर है कि कभी कभी जब वृष राशि का स्वामी शुक्र गुरु से सम्बन्ध रखता है या गुरु की ही मीन राशि मे उच्च का होता है तो व्यक्ति इस संसार के भोगों को भोग लेने के बाद जीवन को पूरी तरह से जीने के बाद उसके लिये फ़िर ज्ञान की ऊंचाइयों पर पहुंचना असंभव नही होता है। लेकिन इअसे लोगों के साथ मुश्किल यही होती है कि भोग विलास वाले जीवन से उन्हे सन्तुष्टि प्राप्त नही होती और वह वहीं अटके रह जाते है। इसी कारण से वृष लगन क एज्यादातर लोगों के लिये जीवन खाने पीने और भोगने का ही दूसरा नाम होता है। इस तरह के जीवन के श्रेष्ठ ज्ञान यानी अध्यात्म से वंचित ही रहते है। वृश लगन के लोगों मे शारीरिक बल की कोई कमी नही होती है,लेकिन उनका शारीरिक बल उस समय देखने मे आता है जब कोई ऐसा काम करना चाहते है जिसमे उनका कोई विशेष उद्देश्य हो। किन्तु कोई ऐसा काम जो उनके अनुसार नही हो उस वक्त वे बेहद सुस्त और आलसी हो जाते है,उनके जीवन की पूरी शक्ति उसी समय ही अपने उद्देश्य पर केन्द्रित होती है जब उन्हे अपनी इच्छा की पूर्ति के लिये कुछ करने की जरूरत है,या जब उनके सामने किसी प्रकार की चुनौती आती है। फ़िर यही वृष राशि का प्रतीक बैल अपना और ही रूप धारण कर लेता है,आज के स्पेन और पुर्तगाल मे बैलों की लडाई का खेल विश्व भर मे प्रसिद्ध है,इस खेल मे जब कोई दिलेर नौजवान हाथ मे लाल कपडा लेकर बैल के आगे भागता है तो जिस शक्ति से बैल उसके पीछे दौडता है तो मानो वह साक्षात यमराज ही हो। लडते समय इस बैल का सबसे शक्तिशाली अंग उसके सींग है और उसके पांव के नाखून यानी खुर है अपने ख्रों को जमीन मे गाडकर वह जिस ढंग से अपने सींगों का प्रयोग करता है देखने मे लगता है कि जैसे वह एक बैल नही बल्कि जमीन मे धंसे हुये सींग हों और किसी भी शत्रु को पछाडने के लिये गुस्से की लहर से भरा बैल साक्षात यमराज का रूप धारण कर लेता ह।

वृष लगन का शरीर के अंगो से विशेष संबन्ध है बहुत से वृष लगन वालों की गर्दन आमतौर पर मोटी और देखने मे बहुत मजबूत होती है। लेकिन गर्दन का बहुत लंबा होना सामान्यत: कम ही पाया जाता है,कुछ हालतों मे जब वृष लगन पर किसी तरह का बुरा प्रभाव हो तो आमतौर पर ऐसे लोगों को गले से संबन्धित रोग होते है। जब वृष लगन पर शुभ प्रभाव हो तो ऐसे व्यक्ति की आवाज मधुर व मीठी हो सकती है। यही कारण है कि बहुत से गाने वाले लोग प्रायं वृष लगन के पाये जाते है। वृष लगन के लोगों के एक विशेष खासियत यह भी है कि ये लोग अच्छे मेहमाननवाज होते है,घर मे आये हुये मेहमानों की सेवा करना उन्हे बहुत खुशी देता है,किन्तु यहां विशेष बात यह है कि यदि कोई मेहमान उनके घर मे रहने के लिये ही आ गया हो और मेहमान की वजह से उनेह अपना स्थान बदलना पडे तो यह उनके लिये बहुत दुखदायी होता है। कहने का तात्पर्य है कि वृष लगन वाले लोग जीवन मे परिवर्तन से बहुत घबडाते है। उन्हे अपने जीवन के ढर्रे मे बार बार परिवर्तन करना पसंद नही होता है। वृष लगन वल एव्यक्ति अपनी भावनाओं को खिलकर व्यक्त नही करते है इसका कारण यह है कि किसी भी योजना के विचार या भावनायें उनके अन्दर इतनी गहराई मे होती है कि किसी दूसरे के लिये जान पाना असंभव सा होता है। लेकिन भावनाओं के मामले मे ऐसे लोग बहुत सच्चे कहे जाते है उनके नजदीकी वे आ जाते है वह सम्बन्ध लगभग हमेशा के लिये स्थापित हो जाता है,प्रेम सम्बन्धो मे ऐसा व्यक्ति किसी को धोखा नही देता है आमतौर पर ऐसे लोग निष्कपट और निश्छल ह्रदय के होते है एक और बात ऐसे लोगों मे विशेषत: पायी जाती है कि ऐसे पुरुष अपनी पत्नी को और स्त्री अपने पति को जरूरत से ज्यादा अच्छा मानते है बेशक उनमे वे सारे गुण न हों मकर फ़िर भी उनका साथी उन्हे बहुत अच्छा ही समझता है।

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