राशियां

भचक्र को बारह राशियों में बांटा गया है तीन सौ साठ अंश को बारह बारह अंश के विभाजन के बाद ही बारह राशियां बनी है.बारह राशिया और उनके स्वभाव उनके तत्व इस प्रकार से है:-

मेष राशि (Aries)

मेष लग्न वालों को खाने में मीठी चीजें (Sweet Food) बहुत पसंद होती है,आत्मविश्वास की कमी नही होती है,शरमाना या झिझकना इनका स्वभाव नही होता है। तथा लंबे समय तक अपनी रुचि को एक विषय या वस्तु पर केन्द्रित नही रख पाते । मेष लग्न वालों की गर्दन लंबी होती है,मेष राशि का सिर और चेहरे पर अधिकार है इसलिये चेहरे से विशेष शक्ति का आभास होता है। सिर का हिस्सा कनपटी के स्थान पर चौडा होता है और ठोढी के स्थान पर थोडा तंग हो जाता है। कद दर्म्याना होता है,मेष लग्न वालों की एक पहचान यह भी होती है कि उनकी भोंहों के बाल बहुत घने होते है। चेहरे पर या सिर पर तिल मस्सा या चोट का कोई निशान होता है। इस लग्न को और ध्यान से समझने के लिये हमे इस राशि के प्रतीक मेढा के कल्पना करनी चाहिये। उसके शरीर में उसका सिर सबसे अधिक शक्तिशाली अंग है,जिससे वह अपने आपको हर खतरे से बचाता है,और मुश्किल की हर दीवार को अपने सिर तोड देता है,यहां यह भी समझना जरूरी है कि बहुत से धार्मिक अवसरों पर मेढे की बलि चढाई जाती है। शायद मेष राशि में अपने आपको किसी विशेष उद्देश्य के लिये कुर्बान करने की शक्ति का होना भी इसी कारण से है। मेष लग्न नववर्ष के आरम्भ होने का प्रतीक है,जो गेंहूं की फ़सल का बीज भूमि के गर्भ में अपनी बलि देकर नये पौधे को जन्म देता है उसकी फ़सल सूर्य के मेष राशि में आने पर बैसाख अप्रैल के मध्य भाग में पककर तैयार हो जाती है। यह मेष लग्न पूर्व दिशा का कारक है,यही कारण कि सूर्य मेष में उच्च का हो जाता है। पतांजलि के योग शास्त्र मे अनुसार सात चक्रों में से स्वधिष्ठान चक्र का स्थान हमारे शरीर में नाभि से नीचे है। हमारे शास्त्रों के अनुसार इस चक्र में दस पत्तियां है,बच्चे के जन्म के समय जब वह मां के गर्भ से बाहर आता है,तो उसका नाडुआ काटा जाता है,नाडुआ बच्चे की नाभि स्थान है,अर्थात स्वाधिष्ठान के पास का स्थान है,नाडुआ काटने के बाद यह बच्चे का स्वतंत्र रूप से संसार में प्रवेश पाने का क्षण है मेष राशि स्वधिष्ठान चक्र की कारक है। स्वधिष्ठान चक्र हमारी उन आंकांक्षाओं का वह अंतर्स्थान है जहां हम केवल चाहते है परंतु उस चाहत का लाभ या हानि नही सोचते यह भी नही जानते कि हमने ऐसा क्यों चाहा ? दूसरे शब्दों में मेष लग्न में मिश्रित भावनाओं का अनुभव होता है। एक बच्चा आधी रात को आम खाना चाहता है,घर में आम नही है लेकिन उसे इस तथ्य से क्या लेना देना है,मेष लग्न का व्यक्ति अपनी इच्छा की पूर्ति चाहता है,और उसके लिये कुछ भी प्रयास करने को तैयार है। इसीलिये जिस इच्छा की पूर्णता के लिये वह चेष्टा करता है शायद वह उतनी महत्वपूर्ण नही होती है और उसकी प्राप्ति के बाद उसे अक्सर महसूस होता है कि उसे उस वस्तु की विशेष आवश्यकता नही थी। मेष राशि के लोगों के जीवन में बहुत जोश के साथ आरंभ किये कार्य कुछ समय के बाद अपने छूट जाते है,और उनके जीवन की बहुत सी उपलब्धियों पर धीरे धीरे समय की धूल पडती रहती है। वह थोडा समय लगने वाले प्रत्येक कार्य को दूसरे लग्नों की तुलना में बहुत बेहतर और पूरी शक्ति लगाकर कर सकते है। किंतु लंबे समय तक अपने शौक को कायम रखना उनके वश की बात नही होती। वे बहुत अच्छे मुक्केबाज फ़ुटबाल के खिलाडी या वेट लिफ़्टर हो सकते है लेकिन शतरंज या क्रिकेट खेलना उनके स्वभाव के अनुकूल नही होता है।

चीन के ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष राशि को ड्रेगन कहते है ड्रेगन चीन के मिथिहास के अनुसार बादशाह या संपूर्ण पुरुष जाति का प्रतीक है,यह दोनों प्रतीक शक्ति के रूप है,शायद यही कारण है कि यह लोग प्रत्येक वस्तु को शाही ढंग से या बहुत बडे पैमाने पर करना चाहते है। इस लग्न के व्यक्तिओ जहां चीन के ज्योतिष में बादशाह या संपूर्ण पुरुष का प्रतीक कहा वहां भारतीय मिथिहास में इस लग्न को समझने के लिये हनुमान जी की कल्पना करें। क्योंकि मेष राशि का स्वामी मंगल है और मंगल के इष्ट हनुमानजी है,जो अपने जोश मे संजीवनी बूटी लाकर मृत लक्ष्मण को जीवित करते है। कई बार किसी परिस्थिति को बुद्धि की बारीकी से सुलझाने के बजाय अपनी असीमित शक्ति को पहले ही निर्धारित कर लेते है,और कार्य आरंभव करने से पूर्व ही उनके अंदर जोश इतना ज्यादा संचार में आजाता है कि उनकी आग की तरह जल रही इच्छायें धुंये में बदल जाती है,यदि वे अपने असीम उत्साह को काबू करने की आदत डाल सकें तो उनके जीवन में प्राप्ति का स्तर बहुत ऊंचा हो सकता है। अगर उन्हे किसे एयोग्य आदमी की राय मिलती रहे तो उनके उत्साह की अग्नि मुश्किल के हर बीहड जंगल को जलाकर अपना रास्ता साफ़ कर लेगी। इसके विपरीत यदि मेष लग्न वाला अपने जोश को काबू में नही रखता किसी योग्य व्यक्ति से सलाह नही लेता तो यह आग उसके निजी जीवन को जलाकर राख कर देगी। यहां पर इस बात को याद रखना चाहिये कि वह किसी भी राय को तभी स्वीकार करेगा जब यह सलाह चीनी की चाशनी में लिपटी हुयी हो। यदि राय हुकुम के रूप में आये तो वह उसे कभी स्वीकार नही करेगा। हुकुम शब्द से ज्यादा शायद किसी और चीज से उसे घृणा नहीं।

मेष लगन वाले व्यक्ति को पहचानने के लिये आप उस आदम की कल्पना कीजिये जो स्वर्ग में शांतिपूर्वक रह रहा था। जब उसको ईश्वर ने यह आज्ञा दी कि इस फ़ल को मत खाना तो आदम ने वही फ़ल खाया और आगे के परिणाम तो हम सबको मालुम है। मेष लगन वाले के लिये वर्जित फ़ल को खाना उसके अंत:करण की जरूरी आवश्यकता है। मेष लगन का व्यक्ति एक बच्चे की तरह से पूरा नंगा है। वह एक जीता जागता सच है,उसके लिये समाज की गहरी कूटनीतियां कोई मायने नही रखती है। यही वजह है कि वह अपने जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में आसानी से समझौते नही करता। उसके स्पष्टवक्ता होने के कारण अपने परिवार के वुयक्ति मित्र उसके बेबाक स्वभाव से घबडा जाते है,इस तरह दूसरों के साथ रिश्तों में कई बार दरार आजाती है। जिसका उसको जीवन में पश्चाताप अवश्य होता है पर उसको यह समझ में नही आता कि उसने ऐसा क्या कर दिया कि दूसरे लोग नाराज हो गये। वह अपनी कल्पनाशीलता की दुनियां में अपने आप यह विश्वास रखता है कि वह जो भी कहता है वह सदा सही होता है। उसका अहम यह नही मान सकता है कि वह गलत भी हो सकता है। मेष अग्नि तत्व की राशि है,मेष लगन वालों के लिये यह जरूरी है कि वह हमेशा कोई उद्देश्य सामने रखकर उससे जूझते रहें। यह जूझना ही उनके जीवन में खुशी और अच्छे स्वास्थ्य का कारण बनता है। समस्याओं को सुलझाने में लगाई गयी शक्ति ही उनकी अंदरूनी आग का ईंधन है जिससे यह आग हवनकुंड की पवित्र ज्वाला की तरह जलती रहती है। यदि उसके सामने कोई निश्चित लक्ष्य न हो तो यह आग उसे अपने आपको जलाने लगती है। जिसके फ़लस्वरूप उसे छोटी छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है। कुछ परिस्थितिया में सर दर्द या रक्तविकार भी पैदा होने लगते है।

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