ग्रहों का आस्तित्व

Existence of Planet -:

Sun-:

Surya or Sun is the father of the world, known as “JAGATPITA”. Al planets are in the motion because of
the power of Sun.It causes two cases one is self case and father case. Responsible for politics, related to
Lord Shiva, and soul of pitra’sson rajya samman prapti(Government job) and eye surgeon .

Moon-:

It cares and brings up the world like godess “Parvati”. This planet is mainly related to sister, water,
food, medicine, vegetables, sea, brain, art, girl friend, pond, irrigation, law and order, and generosity.
Before the marriage it is the symbol or represents the daughter, but after the marriage the in the brides
horoscope it becomes as the mother-in-law. If the location of moon is between in the planets whose
characteristic is cheating, then the person is cheated by others in his entire life. It is also responsible for
the foreign trip.

Mars-:

It is considered as the son of the Earth. In the female cycle it is the case of a husband, also related to
husband, stones, hard materials, fire, anger, police, hospitals, engineer, technology, cooking of the food,
enemy and heart, these all are managed by Mars. In the female cycle if it is weak than it will make them
direction less. In a man’s horoscope it represents the brother.

Budh-:

This is the planet which moves according to the sun and the planet with which it is.and shows its
power according to that. It is related to the work like property, work related to brain, work related to
communication. The person which is affected by Budh starts to make his own laws, and follows them.
And ends up himself in that laws. This is very soft, and seems to be very tender as flower, and explore
contacts in the form of sister, daughter and aunt.

Guru-:

It is called organism, and also compared with Brahma. Without it the motion of the world is impossible.
Responsible for explore more contacts, provides path to live lifewhen is in contact with wealth gives the
position of bank. Provides the ability to make relation of man to a woman and vice verca. When it is
on its peak, then enables person to be meticulous, and gives thoughts to spend life in limits, and when
in bad position, then makes somebody stubborn, attracts him towards the wealth. Nature of a person
depends on Guru. It provides the ideas according to its House and horoscope.

Shukra-:

The shukra is only responsible for providing the physical pleasure in life. Where guru fulfills the
requirements of spirituality and limits, where as Shukra provides ideas only after seeing the physical
pleasure. But without the Moon the Shukra is nothing. If it wants then have the power to convert a
stone in precious one, can make beautiful, which was earlier ugly. Converts a poor into rich., and vice
verca. If it is with Raahu, then it makes itself bigger and makes a person addictive that he cannot make
him free from that. This planet is mainly related to buildings, Wife, sisters, Tantra- Mantra, Acting.

Shani-:

When there the limit of Surya ends, then the limit of Shani also start. Generally, the people which are
born in the morning and evening time, they seems to be bound in the mixed limitations. Either they
work very hard as there is nobody in the world who can compete to them in work, or they are as free, as
they don’t understand what to do. Usually those who born in this time, have disputes to their father or
son. And there will always be misunderstanding.

Rahu-:

This is a shade planet. Try to get the affect of the planet with which it is. When in the life it connects
to the planet of life, tries to give its affect in that field of life in the mean time. the horoscope of the
father ‘s ancestral is read by the Raahu. The problems in life are provided by Rahu and it gives solution
also.

Ketu-:

This is also a shade planet. And always 180 degree to the Rahu. Where gives a bad effect ketu provides
good, and vice verca. As if the Head is controlled by Rahu then the rest body is controlled by Ketu and
vice verca.if Raahu ends the case for having food, the Ketu cares of body according to that case.

सूर्य

सूर्य को जगत पिता कहा गया है इसी की शक्ति से समस्त ग्रह चलायमान है यह आत्म कारक एवं पिता का कारक है पुत्र राज्य सम्मान पद भाई शक्ति दायी आंख चिकित्सा पितरो की आत्मा भगवान भोले नाथ और राजनीति का कारक ग्रह है.

चन्द्र

यह माता पार्वती की तरह से जगत को पालने वाला है जो समस्त संसार का पालन पोषण करती है,बहन जल भोजन सामग्री औषिधि वनस्पति समुद्र मस्तिष्क कला स्त्री मित्र तालाब सिंचाई कानून एवं दया का कारक ग्रह है,शादी के पूर्व कन्या का प्रतिनिधि है लेकिन शादी के बाद विवाहित महिला की कुंडली चन्द्रमा का रूप सास के रूप मे बन जाता है चन्द्रमा अगर धोखा देने वाले ग्रहो के बीच मे फ़ंसा होता है तो आजीवन धोखे ही मिला करता है विदेश यात्रा आदि के कारक के रूप मे भी देखा जाता है।

मंगल

भूमि के पुत्र के रूप मे मंगल की कल्पना की जाती है,यह स्त्री चक्र मे पति का भी कारक होता हिअ और पत्थर कठोर वस्तु अग्नि गुस्सा पुलिस अस्पताल इंजीनियर तकनीकी काम भोजन पकाने के काम शत्रु और ह्रदय को भी मंगल ही सम्भालता है स्त्री चक्र मे मंगल कमजोर होने पर वह उसे दिशाहीन बना देता है। पुरुष कुंडली मे यह भाई का रूप भी प्रदान करता है।

बुध

सूर्य के साथ चलने वाला और जिस ग्रह के साथ हो उस के अनुसार ही अपनी कारकत्व की शक्ति को बताने वाला खरीदने बेचने वाली भूमि का भी कारक बनता है बुद्धि का कारक भी है और कमन्यूकेशन के जितने भी काम होते है सभी के अन्दर बुध का प्रभाव अधिक होता है,इसकी प्रबलता मे व्यक्ति अपने ही कानून बनाकर अपने ही कानून पर चलने वाला और अपने ही कानून के अन्दर खुद को समाप्त करने वाला बनता है। बुध का रूप नाजुक माना जाता है यह फ़ूल के रूप मे कोमलता और बहिन बुआ बेटी के रूप मे सम्पर्क बढाने वाला माना गया है.

गुरु

गुरु को जीव भी कहा गया है ब्रह्मा की उपाधि भी दी गयी है इसके बिना संसार की चाल ही समाप्त हो जाती है यह सम्बन्ध बनाने के लिये भी जीवन मे जीने के लिये रास्ते भी देने के लिये माना जाता है यह धन से रिस्ता जोडने पर बैंक की उपाधि देता है स्त्री को पुरुष से और पुरुष को स्त्री से सम्बन्ध बनाने के लिये अपनी योग्यता को प्रदान करता है उच्च का गुरु संस्कारी बनाता है और मर्यादा से चलने के लिये अपनी युति को प्रदान करता है जबकि नीच का होकर मनमानी करने के लिये और अपनी ही चलाकर भोग और धन के प्रति आकर्षित होने के लिये बाध्य करता है। गुरु के अनुसार ही जीव की प्रकृति को देखा जाता है यह राशि और भाव के अनुसार ही अपनी युति को प्रदान करता है।

शुक्र

जीवन मे जो भी भौतिक सुख है का कारक शुक्र ही है गुरु जहां आध्यात्मिक और मर्यादा का पोषण करता है वही शुक्र केवल भौतिकता को देखकर ही अपनी युति को प्रदान करता है। लेकिन बिना चन्द्रमा के शुक्र की औकात नही होती है। वैसे यह पत्थर को मनमोहक बना सकता है तो कुरूप को भी सुन्दर बनाने की योग्यता को रखता है कंगाल को राजा बनाने और राजा को कंगाल बनाने की क्षमता को रखता है। राहु के साथ मिलकर इसका रूप वृहद बन जाता है और एक प्रकार का नशा इस प्रकार से जीव के अन्दर भरता है कि जीव उस नशे से आजन्म दूर नही हो पाता है। भवन सवारी पत्नी बहिन तंत्र मंत्र आदि के साथ साथ एक्टिंग और प्रहसन की कला में प्रवीण बनाने का काम भी इसी का है।

शनि

जहां सूर्य की सीमा समाप्त हो जाती है वहीं पर शनि की सीमा समाप्त होती है अक्सर जो लोग सुबह और शाम के समय मे पैदा होते है वह सूर्य और शनि की मिश्रित सीमा मे बन्धे होते है या तो वह इतना काम करते है कि उनके बराबार कोई काम नही कर सकता है या वह इतने फ़्री रहते है कि उन्हे कोई काम ही समझ मे नही आता है। अक्सर इस युति मे पैदा होने वाले जातक अपने पिता और अपने पुत्रो के साथ कभी भी सामान्य नही रह सकते है और उनके विचारो मे हमेशा ही कोई न कोई अलगाव रहता है।

राहु

यह छाया ग्रह है जिस ग्रह के साथ होता है उसी ग्रह का असर अपने मे प्राप्त करना इसका काम होता है जीवन मे जब भी यह जीवन के कारक ग्रहों पर अपना गोचर करता है उसी समय मे यह जीवन के उस क्षेत्र के प्रति अपने प्रभाव को प्रसारित करता है। पितामह की जीवनी राहु से ही देखी जाती है जीवन मे आने वाली समस्याये और उनसे मुक्ति का कारण राहु के द्वारा ही प्राप्त होता है।

केतु

यह भी छाया ग्रह है और राहु से हमेशा एक सौ अस्सी डिग्री पर अपना आस्तित्व बनाकर रखता है जहां राहु खराब करता है तो केतु उसे अच्छा करता है जहां राहु अच्छा करता है वहां केतु खराब करता है,जैसे शरीर मे गर्दन के ऊपर का हिस्सा राहु के कब्जे मे है तो शरीर केतु का है राहु अगर भोजन को करने के लिये कारक को समाप्त करता है तो केतु उस कारक के अनुसार शरीर की पालना करता है।

आगे पढें ग्रहों का आपस में सम्बन्ध

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